अजमेर में युवक पर पत्थरों से भरी ट्रॉली पलट गई। उसका पेट 2 हिस्सों में फट गया। आंत समेत पेट के अंदर के अंग बाहर आ गए थे। तिल्ली और किडनी में गहरी चोटें आई थी। कूल्हे (हिप) की हड्डी और आठ पसलियां भी टूट गई थीं। जेएलएन हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने अत्यंत जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन ‘गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन’ कर मरीज की जान बचाई। हॉस्पिटल की लेप्रोस्कोपिक यूनिट के हेड डॉक्टर अनिल शर्मा का दावा है कि अब तक दुनिया में ऐसी सिर्फ 5 सर्जरी की गई हैं। अजमेर में सफलतापूर्वक ऑपरेट किया गया यह मामला वर्ल्ड का छठा और देश का पहला रिपोर्टेड केस है। घटना 11 फरवरी की किशनगढ़ की है। शनिवार को मरीज को छुट्टी दे दी गई। युवक के पेट में खून भरा था डॉक्टर अनिल शर्मा ने बताया कि 11 फरवरी को किशनगढ़ की एक मार्बल फैक्ट्री में नुरसेद (29) काम कर रहा था। पत्थरों से भरी ट्रॉली उस पर पलटने से युवक का पेट दो हिस्सों में फट गया और अंदर के अंग बाहर आ गए थे। मरीज को गंभीर स्थिति में हॉस्पिटल लाया गया था। उसका तीन घंटे तक ऑपरेशन चला। सर्जरी के दौरान युवक के पेट में खून भरा मिला। आमाशय आगे से पीछे तक गोलाई में पूरी तरह फटा था। उसे बारीकी से जोड़कर छोटी आंत में न्यूट्रिशन ट्यूब डाली गई। उन्होंने बताया- गोल्डन आवर में ट्रॉमा केयर मिलने से युवक की जान बच सकी। किसी भी हादसे में गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन होना बहुत कठिन है। आमतौर पर इतनी भयंकर चोट लगने पर व्यक्ति की घटना स्थल पर ही मौत हो जाती है।


