लुधियाना में आवारा कुत्तों का आतंक:काटने से 2 बच्चों और बछड़ों हो चुकी मौत; प्रशासन बेखबर; घरों में रहने पर मजबूर बच्चे

लुधियाना के जगराओं में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गांव हसनपुर में दो बच्चों और कई बछड़ों की मौत की घटना के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शहर के विभिन्न मोहल्लों में आवारा कुत्ते झुंड बनाकर घूम रहे हैं। शिकार की तलाश में घूम रहा कुत्तों का झुंड आवारा कुत्तों के डर से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। कुत्ते कई मोहल्लों में छोटे बच्चों को काटकर घायल कर चुके हैं। हसनपुर की घटना के बाद से अभिभावकों ने बच्चों को अकेले गली में खेलने से मना कर दिया है। शहर और गांवो में आवारा कुत्तों का आंतक इस कदर बढ़ चुका है कि वह सड़कों पर अपना शिकार ढूंढने के लिए झुंड बनाकर घूमते फिर रहे हैं। दुकानदारों ने कई बार दर्ज कराई शिकायत प्रशासन हर साल नसबंदी पर लाखों रुपए खर्च करने का दावा करता है, लेकिन हालात नहीं सुधर रहे हैं। शेरपुरा चौक के दुकानदारों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई है। सुबह सैर पर जाने वाले लोग अपनी सुरक्षा के लिए डंडा साथ लेकर चलते हैं। इस कारण खूंखार हो रहे कुत्ते वहीं स्थानीय निवासी पंकज अरोड़ा और कमल वर्मा ने एक गंभीर मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने सड़क पर अवैध मीट की दुकानें खोल रखी हैं। ये दुकानदार जानवरों के अवशेष कुत्तों को खिला देते हैं। इससे कुत्ते और भी खूंखार हो जाते हैं। हाल ही में आतू वाला चौक से अनारकली बाजार के रास्ते पर कुत्तों के झुंड ने एक महिला को घेरकर काट लिया था। इससे पहले कि कुत्ते और नुकसान पहुंचाते, लोगों ने बड़ी मुश्किल से कुत्तों को भगाया। बच्चों का भी घर के बाहर खेलना और घूमना बंद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ जाने से लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। वहीं महिलाओं का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ जाने से उन्हें हर समय घर के दरवाजे बंद रखने पड़ रहे है। इन दिनों आवारा कुत्तों का झुंड अचानक टूट पड़ने से बच्चों का भी घर के बाहर खेलना और घूमना बंद हो गया है। प्रशासन ने कोई खास प्रबंध नहीं किए आप यह जानकर हैरान होगे जगराओं प्रशासन के पास ना तो बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए कैंटल है और ना ही कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई इंतजाम किया है। इतना ही नहीं इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने कोई खास प्रबंध नहीं किए हैं। लोगों ने कहा कि अधिकारी कम से कम कुत्तों की नसबंदी तो कर सकते हैं, लेकिन लापरवाह अधिकारी इस तरफ भी ध्यान नहीं देते।

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