साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के मामले में बोरानाडा पुलिस पुलिस ने साध्वी को इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंग कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित से गुपचुप मुचलका भरवाकर छोड़ दिया है। देवी सिंह पर उतावलेपन व लापरवाही आरोप था और उसके खिलाफ बीएनएस की धारा (1) मामले में दर्ज था। पुलिस थाने में ही मामला दर्ज होने के दो दिन बाद जमानती मुचलके भरवाकर उसे छोड़ दिया। डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल ने बताया कि देवी सिंह के खिलाफ जमानती धारा का केस था जिसे मुचलका भरवाकर छोड़ दिया गया। इस धारा में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं होती है। गौरतलब है कि जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के करीब 20 दिन बाद सोमवार बोरनाडा पुलिस स्टेशन में साध्वी को इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर देवी सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। कंपाउंडर पर चिकित्सा नियमों में लापरवाही का आरोप है। अगर आरोप साबित हो जाते हैं तो आरोपी देवी सिंह को 2 साल की सजा हो सकती है। 28 जनवरी को हुई थी तबीयत खराब दरअसल, कथावाचक की 28 जनवरी को जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मौत के कारणों की जांच के लिए बनी एसआईटी अब तक साध्वी के पिता, सोशल मीडिया संभालने वाले स्टाफ, रसोइए, कंपाउडर और हॉस्पिटल स्टाफ से पूछताछ कर चुकी है। दरअसल, 28 जनवरी की दोपहर को साध्वी प्रेम बाईसा की बोरनाडा के आश्रम में तबीयत खराब हुई थी। इलाज के लिए कंपाउंडर देवीसिंह ने उन्हें कुछ इंजेक्शंस लगाए थे। इसी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी थी। इन सवालों के जवाब उलझे ? कंपाउंडर आश्रम पहुंचा तब साध्वी को हॉस्पिटल ले जाने जैसी स्थिति नहीं थी। इसलिए घर पर इंजेक्शन दिए। इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि 20 मिनट में मौत हो गई? अगर तबीयत ज्यादा खराब थी तो इंजेक्शन लगने के बजाय अस्पताल जाने की सलाह क्यों नहीं दी? जबकि कंपाउंडर जानता था कि इंजेक्शन एच शेड्यूल के हैं। साध्वी अस्थमा की मरीज थी तो कंपाउंडर ने पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन क्यों लगाया? एसआईटी ने मेडिकल बोर्ड से H शेड्यूल के इंजेक्शनों को लेकर सवाल किए थे। देवीसिंह से एसआईटी ने 20 दिन में करीब 5 बार पूछताछ की थी। पूछताछ में लापरवाही के सबूत सामने आए थे। यह था मामला जोधपुर के पाल रोड आरती नगर स्थित आश्रम में 28 जनवरी को साध्वी को सांस लेने में परेशानी हुई। इसके बाद आश्रम पहुंचे कंपाउंडर देवीसिंह ने इंजेक्शन लगाए। बाद में साध्वी की हालत बिगड़ी तो उन्हें प्रेक्षा हॉस्पिटल लाया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने डेड घोषित कर दिया। बाद में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। वहीं FSL की रिपोर्ट में सांस संबंधी बीमारी से मौत होना सामने आया। पूछताछ में सामने आया कि एसआईटी की पूछताछ के दौरान देवीसिंह ने हर बार नई कहानी गढ़ी। पहले साध्वी के पिता वीरमनाथ की ओर से उपलब्ध कराई गई 3 महीने पुरानी पर्ची के आधार पर इंजेक्शन लगाने का दावा किया। फिर कहा कि एक मेडिकल स्टोर से खरीदे। हालांकि, स्टोर संचालक ने इनकार किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार देवीसिंह ने डेक्सेना व डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन लगाए थे। H शेड्यूल में वे दवा या इंजेक्शन आते हैं, जो डॉक्टर की लिखी पर्ची पर मिल सकते या लगाए जा सकते हैं। एसआईटी ने बोर्ड से अस्थमा के मरीजों को ये इंजेक्शन देने या नहीं देने, रिएक्शन आदि सहित कई सवाल पूछे थे।


