जेडीए की लॉटरी पर संशय, आवेदकों ने डमी लॉटरी निकलवाई:पटेल नगर योजना की आवंटन लॉटरी में हंगामा; आवेदक ने जताई गड़बड़ी की जताई आशंका, डमी लॉटरी निकालने के बाद शांत

जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की आवासीय योजना पटेल नगर की आवंटन लॉटरी में आज आवेदकों ने हंगामा कर दिया। लॉटरी में गड़बड़ी की आशंका मानते हुए आवेदकों ने आवंटन लॉटरी से पहले डमी लॉटरी निकालने की मांग की। जेडीए सचिव समेत अन्य अधिकारियों ने समझाइश और डमी लॉटरी आवंटन लॉटरी के बाद निकलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद आवेदक शांत हुए और लॉटरी प्रक्रिया की गई। दरअसल लॉटरी में आए कुछ लोगों ने लॉटरी शुरू होने से पहले ही विरोध कर दिया। उन्होंने लॉटरी से पहले डमी प्रक्रिया अपनाने की मांग की। उनका आरोप था कि लॉटरी में गड़बड़ी होती है और इससे अपने चहेतों काे फायदा देते हुए भूखंड आवंटित कर दिए जाते है। इस पर जेडीए सचिव निशांत जैन और अन्य अधिकारियों ने लोगों से समझाइश की और लॉटरी पूरी पारदर्शिता से होने का आश्वासन दिया। उन्होंने विरोध कर रहे लोगों को आश्वासन दिया कि लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगर किसी को कोई शंका होगी तो डमी लॉटरी निकालकर उनको संतुष्ट किया जाएगा। सचिव के इसी आश्वासन के बाद विरोध कर रहे लोग शांत हुए और आवंटन की लॉटरी निकाली गई। 270 भूखंड के लिए 52 हजार से ज्यादा आवेदन आगरा रोड पर बगराना के पास प्रस्तावित पटेल नगर योजना के जेडीए ने 14 जनवरी से 13 फरवरी तक आवेदन मांगे। एक महीने में इस योजना में 270 भूखण्डों के लिए कुल 52 हजार 305 लोगों ने आवेदन पत्र भरे, जिसमें से तकनीकी और अन्य कारणों से 189 आवेदन पत्र निरस्त करने के बाद 52 हजार 116 आवेदन पत्रों की लॉटरी निकाली गई। हाउसिंग बोर्ड में पहले पकड़ी जा चुकी है गड़बड़ी राजस्थान हाउसिंग बोर्ड में साल 2012 में लॉटरी में गड़बड़ी को एसीबी ने पकड़ा था। उस समय हाउसिंग बोर्ड के तत्कालीन तकनीकी सलाहाकर को एसीबी ने लॉटरी में गड़बड़ी के चलते गिरफ्तार किया था। तब एसीबी की जांच में सॉफ्टवेयर में छेड़कानी करके अपने चहेतों के नाम से लॉटरी निकालने की गड़बड़ी सामने आई थी। मुख्यमंत्री जन आवास योजना की लॉटरी में होती है गड़बड़ी मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के लिए आरक्षित 5 फीसदी आवासों के आवंटन की लॉटरी को लेकर जेडीए में पिछले कुछ सालों में कई शिकायतें आई है। ये लॉटरी डवलपर अपने ही ऑफिसों में जेडीए के अधिकारियों की निगरानी में निकालते है, जिनमें गड़बड़ी होती है। इसे लेकर कई शिकायतें जेडीए में आ चुके है, जिस पर अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।

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