बूंदी के डाबी में मेवाड़ प्रांतीय सकल दिगंबर जैन समाज के लिए रविवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य, ज्येष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि 108 योगसागर महाराज ससंघ (12 पिच्छी) का सुबह 7:30 बजे डाबी कस्बे में ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। गुरुदेव के आगमन पर समूचा कस्बा ‘गुरुदेव के जयकारों’ से गुंजायमान हो उठा। भक्ति का आलम यह था कि समाज के लोग मुनि की अगवानी के लिए तड़के ही धनेश्वर टोल प्लाजा पहुंच गए। वहां से मुनि के साथ सैकड़ों महिला-पुरुष और बच्चे पैदल चलते हुए डाबी पहुंचे। सुरक्षा की दृष्टि से डाबी थाना पुलिस के जवान और गाड़ी पूरे रास्ते पदयात्रियों को एस्कॉर्ट करते रहे। अहिंसा सर्किल से लेकर दिगंबर जैन मंदिर तक का मार्ग रंग-बिरंगी रंगोलियों, जैन पताकाओं और भव्य स्वागत द्वारों से सजाया गया था। 10 से अधिक स्वागत द्वारों पर भक्तों ने मुनिश्री के पाद-प्रक्षालन किए। समाज के अध्यक्ष विमल धनोपिया ने बताया कि डाबी, कोटा, बिजौलियां और सिंगोली सहित आसपास के क्षेत्रों से 400-500 श्रद्धालु पहुंचे थे। कस्बे में 17 स्थानों पर आहार चर्या के लिए चौके लगाए गए थे, जहां मेले जैसा उत्साह दिखा। मुनि का आहार ज्योति दीदी के यहां संपन्न हुआ। प्राचीन जैन मंदिर के नवनिर्मित सत्संग भवन (नोहरे) में आयोजित धर्मसभा में मुनि ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि ज्ञान आत्मा का लक्षण है, इसे बाहर से प्राप्त नहीं किया जाता बल्कि भीतर से प्रकट किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि संसार में अपेक्षा ही दुख का मूल कारण है और जिसके हृदय में णमोकार मंत्र समाया है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह पहला अवसर था जब इतने बड़े दिगंबर संत डाबी पहुंचे थे, लिहाजा जैन समाज के साथ अन्य समाज के लोगों में भी भारी उत्साह रहा। अखिल रावणा राजपूत समाज के बूंदी जिलाध्यक्ष व सोलंकी परिवार ने भी मुनि की अगवानी कर आशीर्वाद लिया। आयोजन को सफल बनाने में जंभू हरसोरा, फूलचंद, राजेंद्र, धर्मचंद, राजेंद्र खटोड़, चांदमल पोटलीय, अशोक कुमार सावला, प्रकाश खटोड़, पारस बज, देवेंद्र बड़जात्या और सोनू-मोनू हरसौरा सहित समाज के वरिष्ठ जन जुटे रहे। शाम को गुरु भक्ति, प्रतिक्रमण और मंगल आरती के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।


