नागौर में आर्मी की 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन अपना 24 साल पुराना वादा निभाने पहुंची। 2002 में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद की बिटिया की शादी में पहुंच कर पिता की भूमिका निभाई। सारी रस्में पूरी करवाई और बिटिया को नम आंखों से विदाई दी। 24 जवान जब आर्मी की वर्दी में शादी में पहुंचे तो पूरा गांव देख कर बोल उठा- अपने लोग परंपराओं को भूल सकते हैं लेकिन आर्मी नहीं… दरअसल, मरणोपरांत शौर्य चक्र विजेता शहीद भागीरथ कड़वासरा की बेटी की 21 फरवरी को शादी थी। नागौर जिले के मेड़ता उपखंड के पास ग्राम पंचायत कड़वासरो की ढाणी में शनिवार को आयोजन हुआ था। इसमें 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन के 24 जवान, कमान अधिकारी कर्नल सोमेन्द्र कुमार और रिटायर्ड कर्नल सुरेश चंद्र राणा भी पहुंचे। 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन के जवानों ने कहा- ये हमारी परंपरा है, हम अपने साथियों के परिवार को अपना परिवार मानते हैं। इसलिए ये फर्ज निभाने यहां आए हैं। 25 साल पुराना वादा निभाया सैनिकों ने अपने शहीद साथी के प्रति सम्मान और किए गए वादे को निभाते हुए बेटी की शादी में पिता के रूप में सभी पारंपरिक रस्मों को निभाया और उसे आशीर्वाद दिया। विदाई के समय जवानों की आंखें नम हो गईं। यह भावुक पल देखकर गांव के लोग भी भावविभोर हो उठे। ग्रामीणों का कहना था कि आज के समय में जब लोग पारिवारिक जिम्मेदारियों से भी कतराते हैं, ऐसे में सेना के जवानों द्वारा निभाई गई यह जिम्मेदारी वास्तव में प्रेरणादायक है। सुष्मिता की शादी डांगावास निवासी प्रशांत जाखड़ के साथ कल 21 फरवरी को हुई है। शहादत हुई तब डेढ़ साल की थी सुष्मिता रिटायर्ड कर्नल सुरेश चंद्र राणा ने बताया- सुष्मिता शहीद कड़वासरा की इकलौती बेटी है। जो कड़वासरा की शहादत के वक्त केवल डेढ़ साल की थी। रिटायर्ड कर्नल राणा ने बताया- जब भागीरथ कड़वासरा शहीद हुए तो वे सीओ (कमांडिंग ऑफिसर) थे। यह कोई ऑफिशियल अर्रेंजमेंट्स नहीं है बल्कि ग्रेनेडियर्स की परम्परा है कि हम अपने जवानों को अपना परिवार मानते हैं और हम अपने परिवार की केयर भी करते हैं और इसीलिए में अपना परिवार का फर्ज निभाने गुड़गांव से यहां आया हूं। सेना के जवानों ने विवाह की रस्म से पहले शहीद कड़वासारा की मूर्ति पर पुष्पचक्र अर्पित कर सलामी दी। आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे रिटायर्ड कर्नल राणा ने बताया- शहीद भागीरथ कड़वासरा 8 जून 2002 को असम के मिलनपुर गांव में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए एक सैन्य अभियान के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनकी वीरता और अद्वितीय साहस को सम्मान देते हुए 26 मार्च 2003 को भारत सरकार द्वारा उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। 1978 में हुआ जन्म, 1995 में सेना में भर्ती शहीद भागीरथ कड़वासरा का जन्म 10 जनवरी 1978 को नागौर जिले के मेड़ता उपखंड के कड़वासरो की ढाणी में हुआ था। उनके पिता का नाम हप्पाराम तथा माता का नाम मंगली देवी है। उनका विवाह टालनपुर निवासी पूरा राम बांगड़ा की पुत्री संतोष के साथ हुआ था। भागीरथ कड़वासरा का चयन 5 जनवरी 1995 को भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन में हुआ था।


