‘लाइमस्टोन खनन परियोजना से पर्यावरण असंतुलन पैदा होगा’:विधायक ने सीएम को पत्र लिखा; बोले- गोचर भूमि नष्ट हो जाएगी

जैसलमेर जिले के रामगढ़ क्षेत्र में डालमिया सीमेंट को आवंटित चूना पत्थर (लाइमस्टोन) खनन परियोजना की भूमि को निरस्त करने और इसे अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखे गए पत्र के बाद, राज्य सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने इस पर त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। विधायक का तर्क: सात पीढ़ियों की विरासत और पर्यावरण पर संकट विधायक छोटू सिंह भाटी ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि रामगढ़ में प्रस्तावित यह खनन परियोजना आबादी भूमि के पास है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि यदि यहां खनन होता है, तो ग्रामीणों के सात पीढ़ियों से बसे रिहाइशी मकान, पूर्वजों के निवास, देवस्थान, समाधियां और पशुओं के लिए महत्वपूर्ण गोचर भूमि पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। विधायक ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रस्तावित क्षेत्र में सदियों पुरानी नदी, प्राचीन तालाब और पारंपरिक खड़ीन प्रणाली मौजूद है, जो मरुस्थलीय क्षेत्र की ‘जीवनरेखा’ है। भारी विस्फोटों और धूल के कारण इन जल स्रोतों के क्षतिग्रस्त होने से भविष्य में गंभीर जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है। स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का हवाला विधायक भाटी ने स्वास्थ्य संबंधी खतरों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चूना पत्थर के खनन से उड़ने वाली सूक्ष्म धूल बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित होगी। उन्होंने इसे नागरिकों के ‘जीने के अधिकार’ पर सीधा प्रहार बताते हुए मांग की है कि इस आवंटन को तत्काल निरस्त किया जाए और आबादी क्षेत्र से कम से कम 3 किलोमीटर दूर अन्यत्र भूमि आवंटित की जाए। प्रशासनिक हलचल: जिला कलेक्टर से मांगी गई रिपोर्ट विधायक की इस मांग पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने गंभीरता दिखाते हुए उद्योग विभाग को नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। 13 फरवरी 2026: मुख्यमंत्री के विशिष्ट सचिव सिद्धार्थ सिहाग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) को पत्र भेजकर CMIS पोर्टल पर अपडेट देने को कहा। 16 फरवरी 2026: शासन उप सचिव महिपाल कुमार ने आयुक्त उद्योग को अविलम्ब टिप्पणी भेजने के निर्देश दिए। 20 फरवरी 2026: अतिरिक्त आयुक्त पी.एन. शर्मा ने महाप्रबंधक, जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र (जैसलमेर) को निर्देशित किया है कि वे जिला कलेक्टर, जैसलमेर से समन्वय स्थापित कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। ग्रामीणों का विरोध बना जन आंदोलन रामगढ़ और आसपास की ढाणियों के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से विधायक कार्यालय पहुँचकर इस परियोजना के विरुद्ध ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी सांस्कृतिक विरासत और गोचर भूमि को खनन माफिया या कंपनियों के हवाले नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने इसके लिए रामगढ़ में धरना भी लगाया है। फिलहाल, गेंद अब जिला प्रशासन के पाले में है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आवंटन निरस्त करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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