करौली के मदन मोहन मंदिर में फागोत्सव:फाग गीतों पर झूमे श्रद्धालु, फूलों से खेली होली

करौली जिले में इन दिनों फाल्गुन मास का फागोत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। ‘लघु वृंदावन’ के नाम से प्रसिद्ध करौली में मंदिरों, बगीचियों और घरों में होली व फाग गीतों की मधुर गूंज वातावरण को भक्तिमय बना रही है। फाग उत्सव का प्रमुख केंद्र मदन मोहन मंदिर बना हुआ है। यहां प्रतिदिन सुबह मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक फाग गीतों का सिलसिला चलता है। दोपहर में महिला भक्त मंडली और शाम 7 बजे से शयन आरती भक्त मंडली द्वारा होली गीत गाए जाते हैं। श्रद्धालु चंग और ढोलक की थाप पर भगवान मदन मोहन को होली गीत सुनाकर रिझाते हैं।
होली गायन के दौरान बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी सुर-ताल में झूमते दिखाई देते हैं। ढोलक बजाते हुए होली गीतों पर नृत्य किया जाता है, जिससे मंदिर परिसर में उल्लास का माहौल बन जाता है। फागोत्सव के आगे बढ़ने के साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। शयन आरती भक्त मंडली के सदस्यों ने बताया कि प्रतिदिन शाम को मदन मोहन मंदिर परिसर स्थित केशोराय जी मंदिर में और शयन आरती के समय मुख्य मंदिर प्रांगण में होली गीतों की गूंज रहती है। इस दौरान होली गायक और श्रद्धालुओं में भगवान को होली गीत सुनाने की होड़ सी लग जाती है। पुष्प वर्षा के बीच सैकड़ों श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमते हैं।
मदन मोहन मंदिर के अलावा बांके बिहारी मंदिर, गोपाल जी मंदिर और गोविंद देव मंदिर में भी प्रतिदिन फाग और होली गीतों का आयोजन हो रहा है। इस फागोत्सव में पुरुषों और युवाओं के साथ महिलाएं भी बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। फाग उत्सव के दौरान “बरसाने में होरी है”, “चलो आईयो रे होली के खिलार”, “होली खेले उमा संग त्रिपुरारी”, “छलिया नंद किशोर प्रेम की मुरली मधुर बजाय रयो”, “मैं तो तोही संग होली खेलूंगी”, “आ जइयो श्याम बरसाने में” जैसे पारंपरिक होली गीत गूंज रहे हैं। उल्लेखनीय है कि करौली शहर में भगवान कृष्ण और भगवान राम के करीब 400 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं। इसी कारण करौली को लघु वृंदावन कहा जाता है। शहर के लगभग हर गली-मोहल्ले में मंदिरों और घरों में भजन-कीर्तन के साथ होली गीत सुनाई दे रहे हैं। हालांकि पहले चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर होने वाले होली उत्सव अब धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। रविवार को भक्त मंडली द्वारा मंदिर में भगवान की सजीव झांकी और पुष्प होली का आयोजन भी किया गया। होली गायक अंकुश पाराशर की प्रस्तुतियों पर महिला-पुरुष श्रद्धालु झूम उठे, जिससे पूरा वातावरण होली के रंग में रंग गया और भक्ति व उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला।

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