बड़ी कामयाबी:सबसे बड़े नक्सल लीडर देवजी का भी सरेंडर, डेढ़ करोड़ का इनाम व 100 से ज्यादा जवानों की हत्या में हाथ था

सालभर में बड़े नक्सलियों के मारे जाने के बाद अब तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ही संगठन का बड़ा नेता बच गया था। रविवार को उसने अपने 18 साथियों के साथ तेलंगाना के मुलुगु जिले में आत्मसमर्पण कर दिया है। देवजी के साथ सरेंडर करने वाले कमांडर स्तर के नक्सली बताए जा रहे हैं। इनमें से कुछ के नाम सुरक्षा बलों ने फिलहाल सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किए हैं। देशभर से नक्सल खात्मे को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से दी गई 31 मार्च की डेडलाइन से 37 दिन पहले हुए इस सरेंडर को पूरे संगठन की रीढ़ टूटने की तरह देखा जा रहा है। देवजी पर डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम था। इसके अलावा अलग-अलग वारदातों में 100 से ज्यादा जवानों की हत्या में भी हाथ था। सुरक्षा एजेंसियां इस सरेंडर को नक्सल मुक्ति की दिशा में पिछले कुछ सालों की बड़ी सफलताओं में से एक मान रहीं हैं। पुलिस अफसरों के मुताबिक यह आत्मसमर्पण मुलुगु जिले में स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (एसआईबी) और जिला पुलिस की मौजूदगी में हुआ। देवजी संगठन की सेंट्रल कमेटी से जुड़ा वरिष्ठ कमांडर रहा है। उस पर कई राज्यों में सक्रिय रहने के आरोप हैं। बताते हैं कि उस पर करोड़ों रुपए का इनाम भी था। पुलिस का दावा है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे। ये सभी दक्षिण बस्तर और तेलंगाना बॉर्डर एरिया में सक्रिय थे। अफसरों का दावा: लगातार दबाव की रणनीति से मिल रही सफलता
अधिकारियों के अनुसार, हालमें चलाए गए ऑपरेशन जिनमें जंगल इलाकों में लगातार कॉम्बिंग, ड्रोन सर्विलांस और स्थानीय खुफिया नेटवर्क का इस्तेमाल शामिल था का असर साफ दिख रहा है। जवानों ने नक्सलियों की सप्लाई लाइन और मूवमेंट कॉरिडोर पर लगातार दबाव बनाया। नतीजतन, कई कैडर आत्मसमर्पण की राह चुनने को मजबूर हुए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य दोहरा चुके हैं। तेलंगाना में यह कार्रवाई उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पुनर्वास नीति का असर: कैडर के बड़े नेता तेलंगाना में कर रहे समर्पण
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति भी इन फैसलों की बड़ी वजह बताई जा रही है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण, आवास और मुख्यधारा में लौटने के अवसर दिए जाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि देवजी और अन्य कैडरों ने पूछताछ में संगठन की आंतरिक संरचना, हथियार आपूर्ति संपर्क तंत्र को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। आंकड़े बताते हैं, लगातार घटता ही जा रहा है प्रभाव
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते वर्षों में नक्सल प्रभाव वाले जिलों की संख्या में लगातार कमी आई है। बड़ी संख्या में उग्रवादी या तो मारे गए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार ने भी नक्सल नेटवर्क को कमजोर किया है। फिलहाल देश में अब सिर्फ 10 जिले ही नक्सल प्रभावित वाले बचे हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां देवजी और संग्राम से मिली सूचनाओं का विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले महीनों में और भी बड़े आत्मसमर्पण हो सकते हैं। तेलंगाना में यह घटनाक्रम नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। संग्राम ने 50 साथियों के साथ किया आत्मसमर्पण
तेलंगाना में एक अन्य आत्मसमर्पण में नक्सलियों के वरिष्ठ नेता मल्ला राजी रेड्‌डी उर्फ संग्राम ने भी करीब 50 कैडर्स के साथ हथियार डाल दिए हैं। संग्राम को संगठन की रणनीतिक गतिविधियों का अहम चेहरा माना जाता था। पुलिस का कहना है कि दोनों सरेंडर से संगठन की कमान और मैदानी ढांचा कमजोर पड़ेगा। संग्राम कुछ समय पहले तक नक्सली लीडर पापा राव के साथ बीजापुर इलाके में सक्रिय था। इसके बाद वह अचानक गायब हो गया। माना जा रहा था कि वह किसी सुरक्षित ठिकाने में चला गया है, लेकिन अब अचानक ही उसके सरेंडर की खबर आ गई। महासमुंद क्षेत्र के अंतिम नक्सलियों ने लिखा पत्र… 15 माओवादी सरेंडर को तैयार, गृह मंत्री से गुहार- रेडियो पर सुरक्षा का भरोसा दें, चर्चा आज संभव सचिन गुप्ता की रिपोर्ट सीपीआई (माओवादी) के बीबीएम (बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद) डिवीजन के 15 सदस्य हथियारों समेत सरेंडर के लिए तैयार हैं। यह खुलासा संगठन के पश्चिम सब जोनल ब्यूरो सचिव ‘विकास’ के नाम से गृह मंत्री विजय शर्मा को भेजे गए पत्र से हुआ है। इसमें उन्होंने गुहार लगाई है कि उन्हें रेडियो के माध्यम से सुरक्षा की गारंटी दी जाए। पत्र के अनुसार, आश्वासन मिलते ही 2-3 मार्च तक महासमुंद जिले में सरेंडर किया जाएगा। पत्र में कहा गया है कि बदलते आर्थिक-सामाजिक-राजनीतिक हालात में सशस्त्र संघर्ष जारी रखने का औचित्य नहीं रहा और संविधान के दायरे में काम करना चाहते हैं। हालांकि कैडर सरेंडर के बाद घर न भेजकर बैरक में रखने, पुराने केस फिर खोलने और ओडिशा व सीमावर्ती जिलों में कांबिंग जारी रहने को लेकर आशंकित भी है। इसलिए बलांगीर, बरगढ़ व महासमुंद में अस्थायी रूप से सर्च ऑपरेशन रोकने की मांग की है। समूह में 15 सदस्य (डीवीसी-3, एसी-5, पीएम-7) शामिल हैं, जिनमें 14 छत्तीसगढ़ और 1 तेलंगाना का है। अगर यह सरेंडर होता है, तो महासमुंद जिला भी नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा, क्योंकि ये नक्सलियों की आखिरी टुकड़ी है। सूत्रों के मुताबिक- नक्सलियों के प्रस्ताव पर रेडियो से आज चर्चा हो सकती है। जिस माध्यम में चाहें, मैं जवाब भेजूंगा: गृह मंत्री
गृह मंत्री विजय शर्मा ने पत्र की पुष्टि की है। उन्होंने भास्कर को बताया कि हम रेड कारपेट पर नक्सलियों का सरेंडर के लिए स्वागत कर रहे हैं, वो जैसे कहें उन्हें यहां लाने की सुविधा देंगे। उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा दोनों की व्यवस्था की जाएगी। वे पुनर्वास के लिए तैयार रहें। एगा, वे जिस माध्यम से चाहें, उस माध्यम से जवाब भेजूंगा।

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