भास्कर न्यूज | कांकेर जनवादी लेखक संघ और प्रगतिशील लेखक संघ के संयुक्त तत्वावधान में इंकलाबी किताब दिवस पर कवियों, साहित्यकारों के बीच किताब विमोचन का कार्यक्रम किया गया। कांकेर में विगत पांच दशकों से लिखने पढ़ने वालों के बीच अपनी छाप छोड़ने वाले इस्माईल जगदलपुरी के कविताओं, ग़ज़लों, गीतों की किताब “बंद गली की टूटती सांसों की आख़िरी ग़ज़लें” का विमोचन किया गया। कांकेर के पुराने बाशिंदे और संविधान सभा के सदस्य रहे स्व रामप्रसाद पोटाई के परपोते तथा किताबों से रिश्ता रखने वाले पेशे से राजनेता नितिन पोटाई इस अवसर पर मंचस्थ थे। प्रलेस के जिला अध्यक्ष सुरेशचंद्र श्रीवास्तव, ओमप्रकाश भट्ट, अनुपम जोफ़र, प्रो. एनआर साव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। संचालक पीसी रथ ने रचनाकार इस्माईल जगदलपुरी को मंच पर आमंत्रित किया। उनका स्टेट बैंक के कर्मचारी के रूप में शुरू किया सफर, जो गुलशेर खां शानी को जगदलपुर की लाइब्रेरी में पठन, लेखन करते देख-देख कर कैसे लेखन और साहित्य की ओर मुड़ा और फिर कांकेर में रहते हुए किस तरह उन्होंने इस अध्यव्यवसाय को ही अपना जीवन बना लिया। किस तरह नए लिखने वालों को वे मार्गदर्शन देते रहे, भाषा की त्रुटियां सुधारते रहे। हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी तीनों भाषाओं की गलतियां उन्होंने बेझिझक सुधारी और प्रेरित किया। मुख्य अतिथि नितिन पोटाई ने किताबों के प्रूफ के लिए इस्माईल जगदलपुरी की कई बार मदद लेने का जिक्र किया। उन्होंने कांकेर के लिए इस्माईल जी को हीरा बताया जिसका होना हमारे लिए गर्व की बात है। महाविद्यालय की विद्यार्थी दीपिका पटेल ने अपने उपन्यास के एक अंश का पठन किया। कार्यक्रम में गीता शर्मा, पद्मश्री साहू, डॉ स्वामीराम बंजारे, किशोर सिंह ठाकुर, ईश्वर वर्मा, राजेश शर्मा, संतोष श्रीवास्तव, अशोक राठी, सुनील गोस्वामी, कमलेश कोमरा, मोहन सेनापति, अजहर कुरैशी सहित अन्य साहित्य प्रेमी शामिल थे। अंत में जनवादी लेखक संघ और प्रगतिशील लेखक संघ ने इसी तरह भविष्य में भी आयोजन करने की घोषणा की। इंकलाबी किताब का इतिहास बताया: संचालन कर रहे पीसी रथ ने इंकलाबी किताब दिवस पर हुए आयोजन का महत्व बताया कि किस तरह इंकलाबी किताब के प्रकाशन के बाद दुनिया के देखने का नजरिया बदल गया। शाल, श्रीफल, पेन डायरी भेंट कर किया सम्मानित अंत में पोटाई ने शाल, श्रीफल, पेन, डायरी भेंट करते हुए कांकेर की जनता की ओर से इस्माईल जगदलपुरी का नागरिक सम्मान भी किया। क्षेत्र के साहित्यकारों का विवरण देते हुए सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने आशिक अली खां प्रेमी, बदरुल हसन सौदाई, बहादुर लाल तिवारी, रमेश अनुपम, संजीव बख्शी आदि की उपस्थिति के समय का जिक्र किया।


