सालों की तैयारी पर एक मिनट भारी, लेट होने पर परीक्षा से चूके

भास्कर न्यूज | महासमुंद सीजीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को जिला मुख्यालय के 10 केंद्रों में हुई। इस बार परीक्षा को लेकर प्रशासन का रुख बेहद कड़ा रहा। व्यापमं की तर्ज पर लागू कड़े सुरक्षा मानकों और नियमों का असर ऐसा रहा कि एक मिनट की देरी भी परीक्षार्थियों के कई साल की तैयारी पर भारी पड़ गई। जिले में पंजीकृत कुल अभ्यर्थियों में से दोनों पालियों को मिलाकर औसतन 550 से अधिक परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। स्वामी आत्मानंद विद्यालय केंद्र में परीक्षा दिलाने के लिए पहुंचे सरायपाली से दिलीप ने बताया कि आने के बाद केंद्र खोजने में समय लगा। केंद्र पहुंचने तक 9.45 बज चुके थे।। एक मिनट लेट से पहुंचने के बाद अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। गेट बंद कर दिया गया। इसी तरह डाइट केंद्र पहुंचे सुमीत ने बताया कि सफेद हाफ शर्ट पहना हुआ था। किनारे में ए और बी बस प्रिंट था। इतने में ही शर्ट बदलने के लिए भेज दिया गया। महासमुंद से ही होने के कारण समय पर पहुंच पाया, नहीं तो पेपर छूट जाता। गेट बंद होने के बाद कई केंद्रों के बाहर परीक्षार्थी मिन्नतें करते नजर आए, लेकिन नियमों के आगे किसी की नहीं चली। इस दौरान स्वामी आत्मानंद हिंदी आदर्श विद्यालय, आशीबाई गोलछा विद्यालय, शासकीय डीएमएस स्कूल, डाइट, महाप्रभु वल्लभाचार्य महाविद्यालय समेत अन्य केंद्रांे में भी 9.45 के बाद प्रवेश नहीं मिल पाया। 10 बजे तक अभ्यर्थी सेंटरों के बाहर प्रवेश देने की आस में रुके रहे। कड़े नियमों के पालन के चलते निराशा ही हाथ लगी। दूसरी पाली में अभ्यर्थियों की उपस्थिति और घट गई: परीक्षा के नोडल अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर शुभम देव ने बताया कि परीक्षा दो पालियों (सुबह 10-12 और दोपहर 3-5 बजे) में आयोजित की गई। महासमुंद में कुल 2585 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। प्रथम पाली (सामान्य अध्ययन): 2063 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जबकि 522 अभ्यर्थी अनुपस्थित पाए गए। वहीं द्वितीय पाली (योग्यता परीक्षा) में दोपहर की पाली में उपस्थिति और कम हुई। इसमें 2033 अभ्यर्थी शामिल हुए और 552 अभ्यर्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे। सघन जांच : मेटल डिटेक्टर और कपड़ों पर भी नजर केंद्रों में प्रवेश से पहले त्रि-स्तरीय जांच की गई। मेटल डिटेक्टर के साथ-साथ मैन्युअल फ्रीस्किंग की गई। सुरक्षा ऐसी थी कि अभ्यर्थियों को गहरे रंग के कपड़े पहनकर आने से मना किया गया था। महिला और पुरुष अभ्यर्थियों के पहने गए आभूषण, गले की चैन, कान की बाली और अंगूठी तक केंद्र के बाहर ही निकलवाई गई। अभ्यर्थी सुमीत सहिस ने बताया कि द्वितीय पेपर में पूछे गए सवाल दक्षिण दिशा को छत्तीसगढ़ी में क्या कहते है? ने अभ्यर्थियों को उलझा कर रखा था। इसमें आप्शन में दिया गया था। भंडार, रक्सहूं, उत्ती और बुड़ती। इस सवाल ने छत्तीसगढ़ी में कमजोर अभ्यर्थियों को परेशान किया। हालांकि कइयों ने रोचकता के साथ इसका जवाब लिखा।

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