सामाजिक आयोजन में भोजन माहुल पत्तों पर परोसा जाएगा

भास्कर न्यूज | बालोद जिला सेन समाज की बैठक में समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने, सामाजिक मर्यादा बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने महत्वपूर्ण निर्णय लिए। यदि समाज का कोई सदस्य धर्म परिवर्तन करता है या धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों में शामिल होता है, तो उसका पूरा परिवार समाज से रोटी-बेटी संबंध से वंचित रहेगा। यह निर्णय समाज की आस्था, एकता और सनातन धर्म की रक्षा के लिए लिया गया। विवाह समारोह और अन्य कार्यक्रमों में फिल्मी परंपराओं को समाप्त किया जाएगा। विशेष रूप से साली द्वारा जूता छुपाने की परंपरा अब पूर्णतः प्रतिबंधित है। भोजन के लिए पारंपरिक माहुल (सिहरी) के पत्तों का प्रयोग अनिवार्य होगा। समाज के किसी भी सामाजिक आयोजन में भोजन माहुल पत्तों से बने प्लेटों में ही कराया जाएगा। माहुल पत्ते पूर्णतः प्राकृतिक, जैव-विघटनीय और पर्यावरण के अनुकूल हैं। उपयोग के बाद मिट्टी में गलने से प्रदूषण नहीं होता। इसके अलावा माहुल पत्तों में प्राकृतिक औषधीय गुण भी पाए जाते हैं, जो स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। िनयमों का पालन करें मीडिया प्रभारी उमेश कुमार सेन ने कहा कि माहुल पत्तों का प्रयोग केवल भोजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। आधुनिक युग में पर्यावरण संकट के बीच ऐसी परंपराओं का पुनर्जीवन समाज के लिए प्रेरणादायक कदम है। समाज ने सभी सदस्यों से अपील की कि वे सभी सामाजिक आयोजनों में इन नियमों और परंपराओं का पालन करें, ताकि संस्कार, सादगी और स्वच्छता का उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *