बसंत और फाल्गुन विशेष काव्य गोष्ठी में कवियों ने सुनाई रचनाएं

भास्कर न्यूज | कोरबा उद्गार साहित्य समिति न बसंत ऋतु एवं फाल्गुन विशेष काव्य गोष्ठी का आयोजन सेमीपाली में किया। कवि राधेश्याम साहू के निवास पर आयोजित इस गोष्ठी में कवियों ने अपनी अपनी रचनाओं से लोगों को फाल्गुनी में रंग में रंगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के संरक्षक एमआर राव ने की। गोष्ठी में मुकुटधर साहित्य समिति कोरबा के सचिव डॉ.केके चंद्रा उपस्थित रहे। मां शारदे की वंदना के साथ गोष्ठी शुरु हुई। कवि जितेन्द्र वर्मा ने दे अइसन वरदान मां शारदे वंदना गीत की प्रस्तुति दी। राधेश्याम साहू ने सभी कवियों का गुलाब भेंटकर स्वागत किया। उपस्थित कवियों ने गोष्ठी में विविध विधाओं की मनभावन गीत, मुक्तक, कविताएं व गजल सुनाए। मनीष मुसाफिर ने आसमां हो या फिर हो जमी राधिके गजल सुनाई, राधेश्याम ने मुक्तक में कहा अब तुम्हें हम नहीं बुलाएंगे। डॉ. कृष्णकुमार चन्द्रा ने भावपूर्ण पंक्तियां ऐसे बरसेंगे हम, भींग जाओगे तुम। वर्मा ने गजल में फागुन आगे जाग रे संगी सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। फिरोजा खान ने गजल और कविता प्रस्तुत की, कविता जैन ने गजल और मुक्तक दोनों विधाओं में अपनी रचनाएं सुनाईं। कोरल वर्मा ने नवगीत और मुक्तक प्रस्तुत किया। एमआर राव ने नवगीत में कहा इस बार बसंत आया नहीं, मंगवाया गया है। नवल कुमार जोशी ने हास्य-व्यंग्य में ये जो पत्नी है… शीर्षक से हास्यरस में प्रस्तुति दी और शिशिर कुमार तिवारी ने हास्य कविता में होली का रंग बिखेरा। कविता जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया और अपनी फाल्गुनी पंक्तियों के माध्यम से कवियों को काव्य पाठ हेतु आमंत्रित किया।

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