फिजिकल हेल्थ- सलमान के पिता को हुआ ब्रेन हेमरेज:न्यूरोलॉजिस्ट से जानें क्या है ये मेडिकल कंडीशन, शुरुआती संकेत, किसे ज्यादा रिस्क

बॉलीवुड के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर और सलमान खान के पिता सलीम खान को हाल ही में ब्रेन हेमरेज हुआ। वे मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। उनका एक छोटा सा सर्जिकल प्रोसीजर हुआ। अभी उनकी हालत स्थिर है और वे रिकवरी कर रहे हैं। फिलहाल उन्हें कुछ दिनों तक डॉक्टर्स की निगरानी में रखा जाएगा। ब्रेन हेमरेज का मतलब ‘ब्रेन की नस का फटना है।’ नस फटने पर ब्रेन के अंदर खून जमा होने लगता है, जिससे बने दबाव के कारण ब्रेन के सभी हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। यह जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है। ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ के मुताबिक, पूरी दुनिया में हर साल ब्रेन हेमरेज के 35 लाख नए केस सामने आते हैं। ‘सेरेब्रोवस्कुलर सोसायटी ऑफ इंडिया’ के मुताबिक, भारत में हर साल 1.8 से 3.6 लाख ब्रेन हेमरेज के केस सामने आते हैं। इस कंडीशन में लगभग 40-50% लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज ब्रेन हेमरेज की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. राजुल अग्रवाल, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- ब्रेन हेमरेज क्या होता है? जवाब- ब्रेन हेमरेज एक तरह का ब्रेन स्ट्रोक है, जिसे ‘इंट्राक्रेनियल हेमरेज’ भी कहते हैं। इसमें ब्रेन की ब्लड वेसल फटने से ब्लड रिसने लगता है। यह ब्लड ब्रेन के अंदर ही जमा होता रहता है। इस जमा खून से ब्रेन पर दबाव बनता है। हेमरेज (ब्रेन की नस का फटना) और जमा खून से बने दबाव के कारण ब्रेन तक ब्लड की सप्लाई कम हो जाती है या रुक जाती है। अगर 2-3 मिनट तक ब्रेन को ऑक्सीजन न मिले तो ब्रेन सेल्स मरने लगती हैं। इसलिए ऐसी कंडीशन में तुरंत इलाज जरूरी होता है। सवाल- ब्रेन हेमरेज क्यों होता है? जवाब- इसके कई कारण हो सकते हैं- सवाल- ब्रेन हेमरेज कितनी तरह का होता है? जवाब- ब्रेन हेमरेज मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है। इसमें से तीन हेमरेज ब्रेन टिश्यू के बाहर, लेकिन खोपड़ी के अंदर होते हैं, एपिड्यूरल, सबड्यूरल और सबरैक्नॉइड। वहीं दो प्रकार के हेमरेज ब्रेन टिश्यू के अंदर होते हैं- इंट्रासेरेब्रल और इंट्रावेंट्रिकुलर। सभी तरह के ब्रेन हेमरेज और उनकी कॉमन वजह, ग्राफिक में देखिए- सवाल- इनमें से कौन सा ब्रेन हेमरेज सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है? जवाब- सभी प्रकार के ब्रेन हेमरेज गंभीर ही होते हैं, लेकिन इंट्रासेरेब्रल हेमरेज और सबरैक्नॉइड हेमरेज को सबसे ज्यादा लाइफ थ्रेटनिंग माना जाता है। इंट्रासेरेब्रल हेमरेज: इसमें खून सीधे ब्रेन टिश्यू में जमा होने लगता है, जिससे ब्रेन पर तेजी से दबाव बढ़ता है और ब्रेन में स्थायी डैमेज हो सकता है। इससे कोमा की कंडीशन बन सकती है। सबरैक्नॉइड हेमरेज: ये अक्सर एन्यूरिज्म फटने (ब्लड वेसल की वॉल कमजोर होने से फटती है) से होता है। यह तेज सिरदर्द के साथ बेहोशी या मौत का कारण बन सकता है। समय पर इलाज न मिले तो दोनों ही कंडीशंस जानलेवा हो सकती हैं। सवाल- ब्रेन हेमरेज के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? जवाब- कुछ मेडिकल कंडीशंस और चोट के कारण ब्रेन हेमरेज का रिस्क बढ़ सकता है। अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर, सिर पर गंभीर चोट, ब्रेन की नसें कमजोर होने (एन्यूरिज्म) या ब्लड क्लॉटिंग से इसका रिस्क बढ़ जाता है। सभी रिस्क फैक्टर्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या ब्रेन हेमरेज जेनेटिक भी हो सकता है? जवाब- वैसे तो अधिकांश मामलों में ब्रेन हेमरेज का कोई जेनेटिक कनेक्शन नहीं होता है। लेकिन कुछ मामलों में देखा गया है कि लोगों की ब्लड वेसल्स जन्मजात कमजोर थीं। कमजोर ब्लड वेसल्स यानी एन्यूरिज्म। एन्यूरिज्म या वस्कुलर डिसऑर्डर जेनेटिक हो सकता है। अगर किसी के पेरेंट्स को ऐसी समस्या है तो उसे हेमरेज का जोखिम बढ़ जाता है। सवाल- क्या डायबिटीज या हाइपरटेंशन से ब्रेन हेमरेज का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- हां, अनियंत्रित हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) ब्रेन हेमरेज का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। अगर लंबे समय ब्लड प्रेशर हाई रहे तो ब्रेन की वेसल्स की वॉल्स कमजोर हो जाती हैं। इससे उनके फटने की आशंका बढ़ जाती है। डायबिटीज में भी ब्लड वेसल्स डैमेज हो जाती हैं। अगर साथ में ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ा हुआ है तो ब्रेन हेमरेज का जोखिम बढ़ जाता है। सवाल- क्या सिगरेट-शराब पीने से ब्रेन हेमरेज का रिस्क बढ़ता है? जवाब- हां, दोनों के सेवन से ब्रेन हेमरेज का जोखिम बढ़ता है। स्मोकिंग से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, ब्लड वेसल्स की वॉल्स कमजोर होती हैं और एथेरोस्क्लेरोसिस (वेसल्स में कोलेस्ट्रॉल या प्लाक जमना) का खतरा बढ़ता है। शराब पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और लिवर डैमेज हो सकता है। ब्लड क्लॉटिंग कमजोर हो सकती है। ये सभी कंडीशंस ब्रेन की नसों को कमजोर करती हैं, जिससे उनके फटने का खतरा बढ़ जाता है। सवाल- ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक में क्या फर्क होता है? जवाब- ब्रेन हेमरेज एक तरह का ब्रेन स्ट्रोक ही है, लेकिन सभी ब्रेन स्ट्रोक हेमरेज नहीं होते हैं। दोनों में फर्क समझिए- ब्रेन हेमरेज ब्रेन की ब्लड वेसल फटने से खून रिसकर ब्रेन में ही जमा हो जाता है। इससे ब्रेन पर दबाव बढ़ता है और ऑक्सीजन सप्लाई बाधित (रुकती) होती है। स्ट्रोक ब्रेन को पर्याप्त ब्लड और ऑक्सीजन न मिलने की कंडीशन को स्ट्रोक कहते हैं। यह दो तरह का होता है। इस्केमिक (ब्लॉकेज) और हेमरेजिक (नस फटना)। ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक के बीच फर्क ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या ब्रेन हेमरेज जानलेवा भी हो सकता है? जवाब- हां, यह जानलेवा हो सकता है, क्योंकि ब्रेन के अंदर ब्लड जमा होने से अचानक इंट्राक्रेनियल प्रेशर (ब्रेन पर ब्लड रिसने से बना प्रेशर) बढ़ जाता है। इससे ब्रेन सेल्स को ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन मिलना रुक सकता है। इससे ब्रेन के टिश्यूज तेजी से डैमेज होने लगते हैं। अगर ब्लड लीकेज ज्यादा हो या महत्वपूर्ण हिस्से को प्रभावित करे, तो बेहोशी हो सकती है। इससे कोमा की कंडीशन बन सकती है, सांस रुक सकती है या मौत तक हो सकती है। हालांकि, समय पर इलाज, सर्जरी या दवाओं से कई मामलों में जान बचाई जा सकती है। सवाल- किन लोगों को ब्रेन हेमरेज का रिस्क सबसे ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों को ब्रेन हेमरेज का जोखिम ज्यादा होता है- सवाल- क्या ब्रेन हेमरेज होने से पहले कोई संकेत भी दिखाई देता है? जवाब- ज्यादातर मामलों में पहले से बहुत स्पष्ट संकेत नहीं दिखते हैं। इसके ज्यादातर मामलों में अचानक नस फटती है। इसके कुछ संकेत देखिए- सवाल- ब्रेन हेमरेज के रिस्क से बचने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए? जवाब- हेमरेज का रिस्क कम करने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने जरूरी हैं– इसको थोड़ा बढ़ाओ ब्रेन हेमरेज से जुड़े कुछ कॉमन सवाल-जवाब सवाल- ब्रेन हेमरेज के लक्षण दिखें तो क्या करें? जवाब- तुरंत इमरजेंसी एंबुलेंस नंबर 112 पर कॉल करें या किसी नजदीकी अस्पताल ले जाएं। देरी करने से ब्रेन को स्थायी नुकसान हो सकता है। सवाल- क्या ब्रेन हेमरेज अचानक होता है? जवाब- हां, ज्यादातर मामलों में यह अचानक होता है। अगर किसी को हाई बीपी या एन्यूरिज्म (नस की कमजोरी) की समस्या है तो जोखिम ज्यादा रहता है। सवाल- क्या ब्रेन हेमरेज घर पर दवा देकर ठीक किया जा सकता है? जवाब- नहीं, यह मेडिकल इमरजेंसी है। इसकी इलाज सिर्फ अस्पताल में ही संभव है। कई बार सर्जरी की जरूरत भी पड़ती है। सवाल- क्या ब्रेन हेमरेज के बाद मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है? जवाब- समय पर इलाज मिले तो रिकवरी संभव है, लेकिन यह ब्लीडिंग की गंभीरता पर निर्भर करता है। सवाल- क्या इसे दोबारा होने से रोका जा सकता है? जवाब- हां, लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करके इसे दोबारा होने से रोका जा सकता है। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें। नियमित दवाएं लें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें। संतुलित डाइट लें और भरपूर नींद लें। ………………
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