झीलों और किलों के शहर की पहचान से आगे बढ़कर अब मेवाड़ के जंगल भी ग्लोबल नक्शे पर जगह बना रहे हैं। इसकी वजह हैं शहर के भानु प्रताप। उन्होंने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग करने के बाद केंद्र सरकार की पीएसयू नौकरी छोड़ दी। अब वे विदेशी सैलानियों को अरावली की वादियों में एडवेंचर वॉक कराते हैं। भानु पर्यटन मंत्रालय के स्किल इंडिया कार्यक्रम से प्रमाणित नेचुरलिस्ट हैं। वे छोटे समूहों को उन हिडन लोकेशन्स तक ले जाते हैं, जहां आम पर्यटक नहीं पहुंचते। हाइक के दौरान वे पगमार्क आइडेंटिफिकेशन सिखाते हैं। जमीन पर पदचिह्न देखकर जानवर की पहचान कराई जाती है। सदियों पुरानी शिकार ओदियों का इतिहास भी बताया जाता है। दुर्लभ वन्यजीवों से रूबरू होने का मौका ट्रैकिंग के दौरान रस्टी स्पॉटेड कैट, हनी बैजर, लेपर्ड, स्लॉथ बियर और स्मॉल इंडियन सिवेट जैसे दुर्लभ वन्यजीव दिख सकते हैं। कई रेपटाइल्स प्रजातियां भी प्राकृतिक आवास में नजर आती हैं। बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए यह वॉक खास है। ब्राउन फिश आउल, डस्की ईगल आउल और ब्लैक फ्रेंकोलिन को करीब से देखने का अवसर मिलता है। अरावली में विदेशियों को ट्रेकिंग करवाते भानु प्रताप। सात समंदर पार से आ रहे पर्यटक : भानु की वाइल्डलाइफ वॉक का क्रेज विदेशों तक पहुंच चुका है। अमेरिका, ब्रिटेन, पोलैंड, नॉर्वे, कनाडा, मलेशिया और लातविया से पर्यटक उदयपुर आ रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि उदयपुर को प्रीमियम वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किया जाए। वे दक्षिण भारत की अभिनेत्री रिया सुमन को भी उदयपुर में ट्रैकिंग करवा चुके हैं।


