जवाहर कला केंद्र और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में चल रहे दस दिवसीय रंग राजस्थान थिएटर महोत्सव के नौवें दिन नाटकों, संवाद सत्रों और विचार-विमर्श की श्रृंखला देखने को मिली। महोत्सव का आयोजन कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर और जवाहर कला केंद्र के सहयोग से रंग मस्ताने संस्था द्वारा किया जा रहा है। महोत्सव के नौवें दिन जवाहर कला केंद्र की अलंकार गैलरी में लेखक उदयन वाजपेई और रंगकर्मी अभिषेक गोस्वामी के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन महोत्सव के संस्थापक अभिषेक मुद्गल ने किया। इस सत्र में रंगमंच क्या है? विषय पर चर्चा हुई।उदयन वाजपेई ने कहा कि रंगमंच वह स्थान है, जहां एक मनुष्य कुछ और हो सकता है। यह स्वयं को खोजने का माध्यम है। वहीं, अभिषेक गोस्वामी ने भागीदारी रंगमंच को प्रभावशाली बताया, जिसमें दर्शक भी प्रस्तुति का हिस्सा बन सकते हैं। नाट्य प्रस्तुतियों में विविधता और सशक्त संदेश जवाहर कला केंद्र के कृष्णायन सभागार में फैजल रशीद की ओर से निर्देशित तीन कहानियां नाटक का मंचन हुआ। यह प्रस्तुति तीन अलग-अलग कहानियों का समावेश थी, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी थीं। दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया और प्रस्तुति में हास्य का जबरदस्त तड़का देखने को मिला। रंगायन सभागार में राजेंद्र पांचाल के निर्देशन में नाटक अनटाइटल्ड का मंचन हुआ। इस अनूठी प्रस्तुति में अभिनेताओं ने शब्दों की बजाय देह गतियों, ध्वनियों और भाव मुद्राओं से नाटक को जीवंत किया। शाम को ओवलियाकुली खोडजाकुली द्वारा निर्देशित और झिलमिल हजारिका द्वारा प्रस्तुत एकल नाटक “टू किल और नॉट टू किल” का मंचन किया गया। यह नाटक महिलाओं के खिलाफ हिंसा, बलात्कार और पितृसत्तात्मक समाज में उनकी स्थिति पर आधारित था। प्रस्तुति में विलियम शेक्सपियर के नाटक “हैमलेट” के संदर्भ के माध्यम से यह दिखाया गया कि किस तरह महिलाओं को समाज में दबाया जाता है और उनका शोषण किया जाता है।


