21 मार्च से शुरू हो रही इंदिरा गांधी नहर की बंदी बीकानेर में भीषण गर्मी के बीच जल संकट खड़ा कर सकती है। 4 अप्रैल तक पीने का पानी मिलेगा, लेकिन उसके बाद 30 दिन तक पूर्ण नहरबंदी रहेगी। ऐसे में शहर को जलाशयों के सहारे ही पानी सप्लाई करनी होगी और आपूर्ति ‘ओड-इवन’ या दो दिन में एक बार हो सकती है। 5 अप्रैल से बंद हो जाएगी सप्लाई इंदिरा गांधी नहर के मुख्य अभियंता विवेक गोयल ने बताया – 4 अप्रैल तक केवल पीने का पानी दिया जाएगा, जबकि सिंचाई का पानी पहले दिन से ही बंद रहेगा। 5 अप्रैल से पीने के पानी की आपूर्ति भी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। जलदाय विभाग को पहले से एकत्र पानी से ही शहर में जलापूर्ति करनी होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए बीछवाल और शोभासर स्थित जलाशयों को भरने की तैयारी की जा रही है। पंजाब सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया नहर बंदी को लेकर पंजाब सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। बंदी के दौरान पंजाब और राजस्थान में नहरों की मरम्मत का कार्य होगा। मुख्य नहर से लेकर मोघों तक की मरम्मत की जाएगी। इसके लिए दोनों राज्यों की सरकारों ने विशेष बजट भी जारी किया है। नहर बंदी के दौरान बीकानेर शहर में पानी की आपूर्ति कम कर दी जाएगी। जलदाय विभाग नया टाइम टेबल जारी करेगा और संभव है कि दो दिन में एक बार पानी दिया जाए। पिछली बार भी विभाग ने शहर को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर ‘ओड-इवन’ तरीके से जलापूर्ति की थी। जल संकट का करना पड़ सकता है सामना बीछवाल जलाशय में वर्तमान में करीब 2500 मीट्रिक लीटर पानी एकत्र किया जा सकता है, जिससे लगभग 45 दिन तक जलापूर्ति संभव है। हालांकि जलाशय में मिट्टी जमी होने और पूरी क्षमता से नहीं भर पाने की स्थिति में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। नहर बंदी की अवधि बढ़ने की आशंका के चलते विभाग पहले से ही एक दिन छोड़कर एक दिन पानी दे रहा है और सप्लाई की मात्रा भी कम की जा रही है। इसका सबसे अधिक असर कच्ची बस्तियों पर पड़ता है, जहां लोग सीमित मात्रा में ही पानी संग्रह कर पाते हैं। ऐसे में लंबी नहर बंदी के दौरान शहरवासियों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।


