डीग नगर परिषद में पट्टों और वित्तीय लेन-देन से संबंधित 132 महत्वपूर्ण फाइलें लापता होने का मामला 12 साल बाद फिर सामने आया है। इस घटना से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है और करोड़ों रुपए के संभावित घोटाले की आशंका जताई जा रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व पार्षद अमरनाथ गुप्ता ने इस संबंध में नगर परिषद आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने वर्षों बाद भी न तो इन फाइलों का कोई सुराग मिला है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई है। पहली बार 2013 में सामने आया था मामला
शिकायत पत्र में बताया गया है कि यह मामला पहली बार वर्ष 2013 में सामने आया था। उस समय नगर परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने डीग कोतवाली में 132 पत्रावलियों के गुम या चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यह रिपोर्ट न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दी गई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि शुरुआत में मामले को दबाने का प्रयास किया गया था। उस समय सिविल न्यायालय और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर भी एफआईआर से जुड़े दस्तावेजों पर मौजूद थे, लेकिन इसके बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ पाई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कई सालों तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा मामला
हाल ही में जब न्यायालय द्वारा इन पत्रावलियों को तलब किया गया, तब यह सामने आया कि संबंधित रिकॉर्ड कार्यालय से गायब है। इसके बाद नगर पालिका की ओर से पुलिस में तहरीर दी गई थी, लेकिन मामला वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। सवाल उठ रहा है कि जब नगर परिषद का रिकॉर्ड कंप्यूटरीकृत बताया जाता है, तो इतनी बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण फाइलें कैसे लापता हो गईं। यह प्रशासनिक लापरवाही है या किसी सुनियोजित साजिश के तहत अहम दस्तावेजों को गायब किया गया है, इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है। पट्टों और पैसों से जुड़ा है मामला, करोड़ों के नुकसान की आशंका
शिकायत में दावा किया गया है कि जिन फाइलों का कोई पता नहीं है, वे पट्टा वितरण, जमा राशि और अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़ी थीं। ऐसे में राजस्व को भारी नुकसान और बड़े घोटाले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, सूचना का अधिकार कानून लागू होने के बावजूद आम नागरिकों को जानकारी देने में लगातार अड़चनें डाली जा रही हैं। जांच और कार्रवाई की मांग
भाजपा नेता अमरनाथ गुप्ता ने मांग की है कि लापता 132 पत्रावलियों को शीघ्र बरामद कराया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जाए। उन्होंने शिकायत के साथ पुलिस में दी गई पुरानी रिपोर्ट की प्रतियां और फाइलों की सूची भी संलग्न की है।


