सदन की बिग कन्ट्रोवर्सी:16वीं विधानसभा का 5वां सत्र कंट्रोवर्सी में, सदन में चर्चा पर थम नहीं रहा विवाद, आज भी हंगामे के आसार

राजस्थान की 16वीं विधानसभा का पांचवां सत्र एक बड़ी कंट्रोवर्सी में फंस गया है। विपक्ष के सचेतक रफीक खान ने कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की बैठक में किए गए निर्णय और उसके प्रतिवेदन में अंतर बताकर सरकार पर आरोप लगाया। जबकि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इसे निराधार बताया और कहा कि जब बीएसी में प्रस्ताव तय हो गया, तो सदन में चर्चा उससे अलग कैसे कराई जा सकती है। पक्ष और विपक्ष के तर्कों के बीच यह बड़ी कंट्रोवर्सी कितने दिन सदन का कामकाज प्रभावित रखेगा, यह सोमवार की कार्यवाही में दिखेगा। सरकार ने प्रक्रिया और नियमों की धज्जियां उड़ाईं विपक्ष के सचेतक रफीक खान ने विवाद पर कहा- सरकार ने विधानसभा के नियम और प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाई। सदन में शनिवार को सरकार के 2 वर्षों की उपलब्धि के प्रतिवेदन पर सरकार ने प्रस्ताव रखा। यह नियमों के विपरीत था। प्रस्ताव क्या होना चाहिए था
रफीक : सदन में मुख्यमंत्री ने सरकार के 2 साल और कांग्रेस सरकार के 5 वर्षों पर सदन में चर्चा के लिए कहा था। उसके अनुसार सदन में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, लेकिन कार्यसूची ओर प्रस्ताव में “सरकार @ 2 वर्ष प्रगति एवं उत्कर्ष 2024-25-2026 प्रतिवेदन लेकर आ गई। यह नियम विरुद्ध था। सदन में नियम 263 के अंतर्गत बिजली, पानी, ओलावृष्टि सहित अन्य विषयों सहित ऐसे प्रतिवेदन पर चर्चा की जा सकती है। बीएसी में आप राजी क्यों हुए
रफीक : हम राजी नहीं थे। तय हुआ था दो साल बनाम 5 साल। बीएसी के प्रस्ताव में बदल दिया। यानी अब बीएसी के मिनिट्स ऑफिशियल बन जाएं तब ही मीटिंग से बाहर निकला जाए। यह तो सदन की गरिमा के खिलाफ है। 5 साल का काम बताते, आप चर्चा से भागे क्यों?
रफीक : हम भागे नहीं। किसी भी पार्टी की सरकार हो उसकी उपलब्धि के गुणगान के लिए राज्यपाल अभिभाषण, बजट भाषण, विभागों को अनुदान की मांगों पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है। भजनलाल सरकार अपनी झूठी शान को प्रदर्शित करने के लिए सदन का दुरुपयोग करना चाहती है। विपक्ष को तो सदन के गरिमा और संसदीय परंपराओं का सम्मान करना है। विवाद : कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नहीं चाहते कि नेता प्रतिपक्ष बोलें
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा- विपक्ष का हंगामा निराधार और गैर जिम्मेदाराना है। सदन में सदैव नियमों और प्रक्रियाओं की पालना सुनिश्चित हुई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 5 फरवरी को राज्य सरकार के 2 साल की उपलब्धियों का ब्यौरा सदन की पटल पर रखा था। उस दौरान प्रतिपक्ष के सदस्यों ने चर्चा के लिए सदन में सहमति दी थी। बीएसी में जो तय हुआ, प्रस्ताव अलग क्यों?
पटेल : सदन में सहमति के बाद 16 फरवरी को बीएसी की बैठक में सर्वसम्मति से 19वां प्रतिवेदन तैयार किया गया। इसके एजेंडा संख्या 2 में ‘सरकार/2 वर्ष प्रगति एवं उत्कर्ष 2024-25 व 2025-26‘ विषय पर चर्चा के लिए रखा गया। इस प्रतिवेदन को मुख्य सचेतक ने सदन में भी पढ़ा, जिस पर सदन ने सहमति दी। इसके बावजूद शनिवार को प्रतिपक्ष द्वारा हंगामा किया गया। जब सदन ने प्रस्ताव मंजूर किया तो हंगामा क्यों?
पटेल : हमारी सरकार के कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धियों को सुनने की क्षमता विपक्ष में नहीं है। कांग्रेस में अंदरूनी विवाद चल रहा है। इसीलिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नहीं चाहते थे कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सदन में बोलें। जबकि हम चाहते हैं कि विपक्ष हमारी कमियां बताए, जिन्हें हम राज्य हित में सुधार सकें। कांग्रेस ने सदन से वॉक आउट होने का ही काम किया है। प्रस्ताव में 5 साल का काम जुड़वाने में हर्ज क्या था पटेल : मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने दो साल में ऐतिहासिक विकास कार्य कराए हैं। विधानसभा के नियम और प्रक्रियाओं के अनुसार प्रतिपक्ष सदन में अपनी बात रखे। पूर्व मुख्यमंत्री से सोशल मीडिया के बजाय सदन में आकर अपने अनुभव साझा करें। आप अपनी सरकार के काम बताते। किए होते तो बताते न।

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