ऐतिहासिक रथयात्रा आज, 1987 में कट्टरपंथ के दौर में शुरू हुई थी

भास्कर न्यूज | लुधियाना महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवरात्रि महोत्सव कमेटी द्वारा आयोजित ऐतिहासिक रथ यात्रा मंगलवार को गऊघाट मंदिर से निकलेगी। यह यात्रा बैंड-बाजों के साथ 14 किमी का सफर तय करते हुए सर्कुलर रोड, घाटी बाल्मीकि चौक होते हुए दरेसी रामलीला ग्राउंड तक पहुंचेगी। शोभायात्रा में भगवान शिव की स्वर्ण प्रतिमा को चांदी के रथ पर परिवार सहित विराजमान कर पूरे शहर की परिक्रमा करवाई जाएगी। कमेटी के सचिव बलदेव गुप्ता के अनुसार, सुबह 9 बजे चांदी का रथ मंदिर से निकलेगा और देर रात तक भक्तों को आशीर्वाद देते हुए वापसी करेगा। अंत में विराम आरती और भंडारे का आयोजन होगा। लुधियाना में यह भव्य यात्रा पहली बार 1987 में निकाली गई थी, जब कट्टरपंथियों के कारण धार्मिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशें हो रही थीं। उस समय शिवरात्रि महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष सुनील मेहरा, कृष्ण गुप्ता, बलदेव गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता, हरचंद अग्रवाल, ओम प्रकाश अग्रवाल ने इस यात्रा की शुरुआत की थी। पुलिस प्रशासन ने यात्रा रोकने का प्रयास किया, लेकिन जनता के भारी समर्थन और भगवान शिव की कृपा से यह ऐतिहासिक रथयात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस यात्रा में पंजाब भर से लाखों श्रद्धालु शामिल हुए थे। कमेटी के सचिव बलदेव गुप्ता ने बताया कि इस यात्रा की शुरुआत कट्टरपंथियों के खिलाफ एक संदेश देने के लिए हुई थी। 1980 के दशक में आतंकवाद के चलते लोग शाम को घरों में कैद होने लगे थे, धार्मिक स्थलों पर जाने में डर महसूस करते थे। ऐसे में भगवान शिव की आराधना और हिंदू-सिख एकता को मजबूत करने के लिए इस यात्रा की नींव रखी गई। शुरुआती वर्षों में यह यात्रा महादेव की एक फोटो और छोटी प्रतिमा के साथ निकाली जाती थी। लेकिन 2001 में श्रद्धालुओं के सहयोग से चांदी के भव्य रथ का निर्माण करवाया गया। इसके निर्माण में महेंद्रपाल गुप्ता, रजनीश जैन, मोहन लाल अग्रवाल, दामोदर प्रसाद टोढ़ी, भान देवी, शांति प्रकाश जैन, गोरख गोयल, किशन चंद गुप्ता समेत कई श्रद्धालुओं का योगदान रहा। तब से बीते 24 वर्षों से शिव परिवार की चांदी के रथ पर यात्रा निकाली जा रही है। लुधियाना से शुरू हुई इस परंपरा ने धीरे-धीरे पूरे पंजाब में अपनी जगह बना ली और अब राज्य के विभिन्न हिस्सों में इसी तर्ज पर भव्य रथ यात्राएं आयोजित की जाती हैं।

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