गुरदासपुर में पुलिस कर्मियों की मौत के बाद विपक्षी दलों ने पंजाब सरकार को को निशाने पर ले लिया। शिरोमणि अकाली दल ने तो सीएम भगवंत मान से इस्तीफा तक मांग लिया। शिअद का आरोप है कि पंजाब सरकार सूबे में लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने में पूरी तरह से असफल है। शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सीएम भगवंत मान का इस्तीफा मांगा। उनहोंने कहा कि कहा कि पंजाब की कानून-व्यवस्था एक बड़े संकट के मोड़ पर खड़ी है। राज्य में संवैधानिक व्यवस्था बुरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि किसानों का संघर्ष को कुचलने की बात आती है, तो सरकार किसानों के घरों में आंसू गैस छोड़कर उन्हें बाहर निकालती है और लाठी चार्ज कर देती है। दूसरी ओर आतंकवाद के सामने सरकार घुटने टेकती दिखाई दे रही है। इसलिए आज पंजाब की कानून-व्यवस्था की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। पब्लिक में असुरक्षा का माहौल डॉ चीमा ने कहा कि पुलिस मुख्यालयों और चौकियों पर हमले, धार्मिक स्थलों के पास विस्फोट, और रोज़ाना हो रही लूट-खसोट, फिरौती तथा हत्या की घटनाओं ने लोगों के मन में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। गुरदासपुर जिले के एक गांव में पुलिस चौकी के अंदर ड्यूटी कर रहे एएसआई और हेड कांस्टेबल पर गोलीबारी कर दोनों की हत्या कर दी गई। यह घटना बेहद गंभीर है। यदि कानून के रखवाले ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक स्वयं को कैसे सुरक्षित महसूस करे? मुख्यमंत्री को बताया जिम्मेदार वर्तमान समय में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं गृह विभाग संभाल रहे हैं। इसलिए कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री पर आती है। नैतिक रूप से उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, ताकि लोगों का कानून और संविधान में विश्वास बहाल हो सके। यह मामला केवल राजनीतिक विरोध का नहीं, बल्कि पंजाब की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा है। यदि सरकार हालात को नियंत्रित करने में असफल रहती है, तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देकर पद छोड़ देना चाहिए।


