चित्तौड़गढ़ के जिला हॉस्पिटल में रविवार देर रात एक 65 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। सोमवार को इस घटना से नाराज डॉक्टरों ने एक घंटे की सांकेतिक हड़ताल की और जिला हॉस्पिटल से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने हॉस्पिटल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई। उन्होंने अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रभा गौतम और एडिशनल एसपी सरिता सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और कहा कि यदि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में काम करना मुश्किल हो जाएगा। प्रदर्शन के बाद डॉक्टर वापस हॉस्पिटल लौटे और अपनी ड्यूटी संभाली। इस दौरान हॉस्पिटल में मरीजों की काफी भीड़ देखी गई। कुछ समय के लिए मरीजों को भी परेशानी हुई और डॉक्टरों ना देखकर सभी चौंक गए। लेकिन हड़ताल केवल एक घंटे की होने से कामकाज पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ। इलाज के दौरान बिगड़ी तबीयत, आईसीयू में हुई मौत जानकारी के अनुसार रविवार रात करीब 65 साल के रतनलाल गुर्जर को उनके परिजन बीपी और शुगर की समस्या के कारण जिला हॉस्पिटल लेकर आए थे। उस समय इमरजेंसी में नए डॉक्टर मनीष की ड्यूटी थी। उन्होंने मरीज की जांच की और हालत को देखते हुए मेल वार्ड में भर्ती कर दिया। परिजनों के अनुसार करीब आधे घंटे बाद रतनलाल की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की हालत पहले से ही गंभीर थी और उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की गई। मौत के बाद परिजनों का गुस्सा, डॉक्टरों से की धक्का-मुक्की मरीज की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए। आरोप है कि गुस्से में परिजनों ने इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर मनीष के साथ धक्का-मुक्की की और हाथ भी उठाया। इस दौरान मौके पर पहुंचे एक अन्य डॉक्टर जगदीश को भी अपशब्द कहे गए। हॉस्पिटल में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन डॉक्टर इस घटना से बेहद आहत हो गए। सुरक्षा बढ़ाने की मांग, अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं घटना के विरोध में सोमवार को डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से एक घंटे का काम का बहिष्कार किया और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां अधिकारियों को ज्ञापन देकर हॉस्पिटल में पर्याप्त सुरक्षा गार्ड लगाने की मांग की गई। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं उनके मन में डर पैदा करती हैं और इससे इलाज का माहौल प्रभावित होता है। इस मामले में सदर थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। प्रशासन ने डॉक्टरों को उचित सुरक्षा का भरोसा दिया है।


