अफगानियों ने जबलपुर के फर्जी पते पर बनवाए पासपोर्ट:ढाई-ढाई लाख में किया सौदा; एमपी एटीएस ने कोलकाता से 5 गिरफ्तार किए

मध्यप्रदेश एटीएस (ऐंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एटीएस ने फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में कोलकाता से 5 अफगान नागरिकों को गिरफ्तार किया है। रविवार को इन सभी को जबलपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 25 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। कोलकाता से जबलपुर तक जुड़ा कनेक्शन पकड़े गए आरोपियों की पहचान जिया उल रहमान, सुल्तान मोहम्मद, रजा खान, सैयद मोहम्मद और जफर खान के रूप में हुई है। एटीएस की जांच में सामने आया कि ये सभी 2018-19 में काबुल (अफगानिस्तान) से दिल्ली होते हुए कोलकाता पहुंचे थे। इनमें से सुल्तान मोहम्मद मेडिकल वीजा पर आया था, जबकि बाकी चार अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुए थे। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन अफगान नागरिकों ने भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए जबलपुर में रह रहे मास्टरमाइंड सोहबत खान से प्रति व्यक्ति करीब ढाई लाख रुपए में डील की थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दस्तावेज में 300 मोतीनाला तालाब सदर, 410 उपरैनगंज और 870 छोटी ओमती जैसे पते दर्ज कराए, जो वास्तविक नहीं थे। इन फर्जी पतों के आधार पर पासपोर्ट आवेदन किए गए और सत्यापन प्रक्रिया पूरी कराई गई। 5 में से 4 पासपोर्ट जारी हो चुके थे, जिनमें से 3 एटीएस ने जब्त कर लिए गए हैं। एक पासपोर्ट गलत पते के कारण पासपोर्ट कार्यालय वापस लौट गया था। एके-47 वाली फोटो से शुरू हुई थी जांच इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ तब शुरू हुआ, जब मुख्य आरोपी सोहबत खान ने सोशल मीडिया पर AK-47 राइफल के साथ अपनी फोटो पोस्ट की थी। अगस्त 2025 में उसकी गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने कड़ियां जोड़ना शुरू किया। सोहबत 2015 में भारत आया था और जबलपुर में निकाह कर यहीं बस गया था। अब जानिए सोहबत ने इसकी शुरुआत कैसे की… 2015 में भारत आकर जबलपुर में निकाह किया जांच में सामने आया कि सोहबत खान 2015 में पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत आया और भोपाल होते हुए जबलपुर पहुंचा। यहां छोटी ओमती क्षेत्र में रहने वाली एक महिला से उसने निकाह किया और यहीं रहने लगा। पिछले करीब दस सालों में उसने जबलपुर में रहकर निजी काम किए। अकबर का पासपोर्ट बनवाकर शुरू किया फर्जी काम सोहबत खान ने सबसे पहले अकबर नाम के एक व्यक्ति का पासपोर्ट बनवाने की डील की। इसके लिए दो से ढाई लाख रुपए लिए गए। गिरोह के सदस्य दिनेश गर्ग, महेंद्र कुमार सुखदान और चंदन सिंह ने जबलपुर के फर्जी पते पर अकबर के निवास और पहचान दस्तावेज तैयार कराए। पोस्टमैन को 3 हजार देकर पासपोर्ट लिया पासपोर्ट सेवा केंद्र में सत्यापन के लिए अकबर को जबलपुर बुलाया गया, जहां उसने फोटो और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की। पासपोर्ट जारी होने के बाद गिरोह ने पोस्टमैन को 3 हजार रुपए देकर रास्ते में ही पासपोर्ट ले लिया। सरकारी कर्मचारी और अन्य सहयोगी भी गिरफ्तार इस मामले में एटीएस ने अगस्त 2025 में ही कोलकाता निवासी मोहम्मद इकबाल और अकबर, जबलपुर निवासी कथित अधिवक्ता चंदन सिंह, वन विभाग कर्मचारी दिनेश गर्ग और महेंद्र कुमार सुखदान को भी गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट बनवाने में सहयोग किया। अब तक कुल 11 गिरफ्तार हो गए है। एटीएस अब पूरे नेटवर्क, अन्य विदेशी नागरिकों और शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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