ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनरेखा माने जाने वाली ओरण भूमि और खेजड़ी के पेड़ों को बचाने की मुहिम तेज हो चली है। सोमवार को विभिन्न जिलों से चली पदयात्रा जोधपुर पहुंची, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सैकड़ों लोग हाथों में तख्तियां लिए नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा, जिसमें ओरण भूमि पर अतिक्रमण रोकने, खेजड़ी के पेड़ों की सुरक्षा और स्थानीय पारिस्थितिकी संरक्षण की मांग की गई। पदयात्रा के नेताओं ने कहा, ओरण भूमि हमारी संस्कृति और आजीविका का आधार है, इसे बचाना हमारा संकल्प है।
पदयात्रा में शामिल सुमेर सिंह सांवरा ने बताया कि ओरण, देव भूमि को संरक्षित करने के लिए सभी समाज के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं। हमारी एक ही मांग है कि हमारी ओरण को बचाओ, उजाड़ो मत। सरकार की यदि मंशा नहीं है तो वो हमारे धैर्य की परीक्षा न लें। कांग्रेस ने भी बहुत नष्ट किया और ये सरकार भी जो कर रही है वो गलत है। सरकार हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है।
पदयात्रा में शामिल पांच दर्शन जूना अखाड़े के संगठन मंत्री और सिवाना मठ के श्री महंत सत्यम गिरी महाराज ने बताया कि सरकार से ओरण की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की गई है। पदयात्रा में मारवाड़ राजपूत सभा के अध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा, बिश्नोई समाज के परस राम बिश्नोई, जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष अरविंद सिंह भाटी, छात्र नेता मोती सिंह जोधा सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।


