सीकर के डॉक्टर की याचिका पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान:हर जिले को भेजनी होगी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की रिपोर्ट, 2012 में लगाई थी याचिका

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के सभी जिलों में कचरा संग्रहण-निस्तारण की जानकारी मांगी है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रिपोर्ट को लेकर हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी 41 जिलों की रिपोर्ट मांगी है। सीकर के समाजसेवी डॉ. वीके जैन की 14 साल पुरानी जनहित याचिका पर अब हाईकोर्ट ने ये बड़ा फैसला लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से प्रदेश के 41 जिलों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा संग्रहण और निस्तारण) का रोडमैप मांगा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश केसर महावीर सेवा ट्रस्ट व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। हाईकोर्ट ने प्रदेश के 41 जिलों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की रिपोर्ट और सभी जिलों के कस्बों(नगरपालिका/नगरपरिषद) में कचरा निस्तारण में नियुक्त कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। डॉ. जैन ने याचिका में सीकर जिले में कचरे का समुचित निस्तारण नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था। वहीं, हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका को पूरे प्रदेश के लिए कन्वर्ट कर दिया था।
2012 में लगाई थी जनहित याचिका एडवोकेट किंशुक जैन ने बताया- यह मामला 14 साल से चल रहा है। डॉ. वीके जैन की ट्रस्ट की जनहित याचिका पर 2015 में स्वायत शासन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी करके सभी नगर पालिकाओं को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। लेकिन अधिकतर नगर पालिकाओं में इसकी पालना नहीं की जा रही है। डॉ. वीके जैन ने बताया कि सीकर में स्टेशन रोड पर डोर टू डोर कचरा उठाने के लिए उन्होंने निजी खर्चे पर 3 ऑटो टीपर लगाए थे। इसके बाद सीकर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जनहित याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट ने इसे पूरे प्रदेश के लिए कन्वर्ट कर दिया। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत कचरा संग्रहण से लेकर उसके निस्तारण की विधि तय है, परंतु कहीं भी इसकी पालना नहीं की जा रही है। वहीं अधिकतर जगह कचरा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की मुख्य प्रक्रिया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की पूरी प्रक्रिया तय है। इसमें कचरे के संग्रहण से लेकर निस्तारण के कई स्टेप हैं। लेकिन बड़े शहरों को छोड़कर कहीं भी इसकी पूरी पालना नहीं की जा रही। इसके अलग-अलग चरण हैं- संग्रहण (Collection): घर-घर से या सामुदायिक केंद्रों से कचरा जमा करना। पृथक्करण (Segregation): कचरे को गीले (जैविक) और सूखे (प्लास्टिक, कागज, धातु) में अलग-अलग करना। परिवहन (Transportation): कचरे को वाहनों के माध्यम से प्रोसेसिंग साइट तक ले जाना। उपचार और पुनर्चक्रण (Processing Recycling) कम्पोस्टिंग: गीले कचरे से खाद बनाना। रिसाइकलिंग: सूखे कचरे को पुनः उपयोग के लिए संसाधित करना। निपटान (Disposal): अंतिम अवशेषों को लैंडफिल (Landfill) में सुरक्षित रूप से डालना।

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