फलोदी के कृषि विज्ञान केंद्र में मसाला फसलों की ट्रेनिंग:किसानों को आधुनिक तकनीक के बारे में बताया, रोग और समस्या की पहचान बताई

फलोदी के कृषि विज्ञान केंद्र में मसाला फसलों की आधुनिक उत्पादन तकनीकों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. बी.आर. चौधरी कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर, जोधपुर और सुपारी एवं मसाला विकास निदेशालय, कालीकट के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें किसानों को मसाला फसलों की उन्नत खेती के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को मसाला फसलों की उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात की संभावनाओं से अवगत कराना था। इसका लक्ष्य था कि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी उपज और आय में वृद्धि कर सकें। वैज्ञानिक खेती अपनाने पर दिया जोर
कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. एम.एल. मेहरिया ने अपने संबोधन में मसाला फसलों का क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी और अजवाइन जैसी प्रमुख मसाला फसलों में बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग और समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने की सलाह दी। इसी अवसर पर केंद्र में चल रहे 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र के प्रशिक्षण का समापन भी किया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस.के. बैरवा ने मसाला फसलों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यात मानकों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अवशेष मुक्त (रेजिड्यू फ्री) उत्पादों की मांग बढ़ रही है, इसलिए किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती पद्धतियों की ओर बढ़ना चाहिए। कम लागत वाली फसलों की तकनीक के बारे में बताया
डॉ. हरि दयाल चौधरी ने मसाला फसलों में उन्नत उत्पादन तकनीकों के साथ-साथ संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) और कम लागत वाली तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उन्नत बीज, उचित दूरी, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने फसल चक्र अपनाने और मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन की आवश्यकता पर भी बल दिया। रोग और समस्याओं की पहचान पर विस्तार से चर्चा
डॉ. नीलम गेट ने मसाला फसलों में रोग प्रबंधन एवं गुणवत्ता सुधार के विषय में जानकारी दी। उन्होंने अल्टरनेरिया ब्लाइट, पाउडरी मिल्ड्यू एवं उखटा रोग जैसी प्रमुख समस्याओं की पहचान एवं नियंत्रण उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जैव एजेंट्स के उपयोग, ट्राइकोडर्मा उपचार एवं सुरक्षित रसायनों के संतुलित प्रयोग की सलाह दी। प्रश्नोत्तर सत्र का हुआ कार्यक्रम
प्रशिक्षण में केंद्र के डॉ. गजानन्द नागल और डॉ. प्रियंका कटारा का भी योगदान रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने किसानों की खेत स्तर की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया। अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे क्षेत्र में मसाला फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

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