झुंझुनूं के श्री राधेश्याम आर. मोरारका राजकीय महाविद्यालय में सोमवार को ‘विकसित भारत युवा संसद 2026’ का जिला स्तरीय आयोजन हुआ। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र “आपातकाल के 50 वर्ष: भारतीय लोकतंत्र के लिए सबक” विषय रहा। इस दौरान जिले के चुनिंदा युवाओं ने लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों के प्रति अपनी प्रखर आवाज बुलंद की। सजग नागरिक ही विकसित भारत की नींव: प्राचार्य चौधरी कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. मंजू चौधरी के मार्गदर्शन में हुआ। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश के सर्वांगीण विकास में युवा शक्ति की भूमिका सर्वोपरि है। उन्होंने जोर देकर कहा, “युवाओं को केवल दर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सक्रिय भागीदार बनना चाहिए। लोकतांत्रिक परंपराओं की समझ ही एक जागरूक और सशक्त नागरिक की पहचान है।
आपातकाल के सबक और वर्तमान चुनौतियां
युवा संसद के दौरान कुल 12 प्रतिभागियों ने मंच से अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने 1975 के आपातकाल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे उस दौर ने भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की महत्ता को और अधिक स्पष्ट किया। प्रतिभागियों ने तर्क दिया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की स्वायत्तता ही लोकतंत्र के असली स्तंभ हैं, जिन्हें किसी भी परिस्थिति में अक्षुण्ण रखा जाना चाहिए। राज्य स्तर के लिए 5 विजेताओं का चयन प्रतियोगिता में शामिल युवाओं के तर्क, भाषा शैली और नेतृत्व क्षमता का आकलन करने के बाद निर्णायक मंडल ने पांच सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों का चयन किया। ये प्रतिभागी अब राज्य स्तर पर झुंझुनूं जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे। पूजा तंवर सोनिया भारतेंदु मंताशा कपूर आनिया राठौड़ अतिथियों ने सराहा युवाओं का जज्बा कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं जिला युवा अधिकारी मधु यादव ने चयनित प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ‘युवा संसद’ जैसे मंच युवाओं के व्यक्तित्व विकास और नेतृत्व कौशल को निखारने का बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यहाँ से निकले विचार देश की नीति निर्धारण में सहायक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम संयोजक डॉ. विकास मील ने ‘विकसित भारत 2047’ की संकल्पना प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमें इतिहास की गलतियों से सीखकर एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्व का नेतृत्व करे। निर्णायक मंडल और प्रबंधन कार्यक्रम की पारदर्शिता के लिए एक निर्णायक मंडल बनाया गया। जिसमें प्रो. मनोज कुल्हार (प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय मलसीसर), प्रो. संजीव कुमार (राजकीय कन्या महाविद्यालय), अरविंद कुमार (सहायक निदेशक, बाल अधिकारिता विभाग), मनु धनखड़ एवं विकास चाहर (एपीआरओ) शामिल थे। मंच का संचालन डॉ. आकांक्षा डूडी एवं डॉ. बरखा सिंह ने किया। कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. विकास मील ने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।


