प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड में सीकर के रामदेव सिंह मील के संघर्ष को प्रेरणादायी बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में रामदेव की कहानी शेयर कर देश को ‘अंगदान’ के प्रति जागरूक किया। मोदी ने कहा- रामदेव सिंह की कहानी केवल बीमारी को हराने की नहीं, बल्कि मृत्यु के द्वार से लौटकर तिरंगा फहराने की अद्भुत गाथा है। रामदेव सिंह सीकर जिले के कंवरपुरा गांव के मूल निवासी हैं और वर्तमान में सालासर में बिजली विभाग में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं। साल 2012 में पेट की गंभीर समस्या के कारण रामदेव की दोनों किडनी फेल हो गईं। इस मुश्किल घड़ी में उनकी मां श्योकोरी देवी ने उन्हें अपनी एक किडनी डोनेट की, जिसने रामदेव को नया जीवन दिया। पूरी तरह ठीक होने में उन्हें करीब एक साल लगा, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। रामदेव सिंह ने मन की बात कार्यक्रम में जिक्र होने पर पीएम नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। रामदेव दो बार मुंबई में आयोजित नेशनल ट्रांसप्लांट गेम्स में हिस्सा ले चुके हैं। पहली बार उन्होंने गोल्ड और सिल्वर मेडल्स सहित कई पदक जीते, जबकि दूसरी बार दो सिल्वर मेडल्स उनके नाम रहे। उनकी सफलता का चरम पिछले साल जर्मनी के ड्रेसडेन में हुए वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में देखने को मिला, जहां उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए भाला फेंक में गोल्ड, लंबी कूद में सिल्वर और बॉल थ्रो व डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीते।
एक साल लगे सही होने में
रामदेव सिंह को पूरी तरह ठीक होने में लगभग एक साल लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वे अपने खेल के प्रति प्रेम को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। रामदेव का मानना है कि ट्रांसप्लांट प्लेयर्स को सरकार से अधिक पहचान, आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। अपने सकारात्मक दृष्टिकोण और अटूट इच्छाशक्ति के साथ वे लगातार ट्रेनिंग ले रहे हैं, ताकि दूसरों को प्रेरित कर सकें। यह साबित कर सकें कि ट्रांसप्लांट के बाद भी हौंसले और सफलता की कोई बॉर्डर लाइन नहीं होती। किसान हैं रामदेव सिंह के पिता रामदेव सिंह के पिता अमराराम मील और माता श्योकोरी देवी खेती व पशुपालन का काम करते हैं। रामदेव सिंह की एक बहन थी, लेकिन कोरोना के कारण 2021 में उसकी मृत्यु हो गई। फिलहाल रामदेव सिंह ही बहन की तीनों बेटियों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके खुद के दो बच्चे एक बेटा यशराज(14) और एक बेटी अनिशा (6) है। उनकी पत्नी हाउसवाइप हैं। रामदेव सिंह ने स्कूली पढ़ाई अपने पैतृक गांव कंवरपुरा से ही की है जबकि कॉलेज की पढ़ाई सीकर एसके कॉलेज से की। पीएम मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में सीकर के रामदेव के हौंसले और जुनून की कहानी को सबके साथ शेयर किया। रामदेव सिंह का कहना है कि देश का नाम रोशन करने वाले ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों को राजस्थान सरकार की तरह से ना कोई पद और ना ही फाइनेंशियल सपोर्ट कर रही है। दवाइयों और ट्रांसप्लांट के भारी भरकम खर्च के बाद अपने ही स्तर पर खर्चा करके खेलना बहुत मुश्किल है और ना ही गृह जिले में ट्रांसफर हो रहा। सरकार की इस अनदेखी से रामदेव सिंह हताश और निराश हैं, भविष्य में तैयारी के लिए पैसे नहीं हैं। बिजली विभाग के एईएन जितेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सालासर ऑफिस के टेक्नीशियन रामदेव सिंह को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस प्रोत्साहन से बिजली विभाग के सभी कर्मचारी बहुत उत्साहित हैं और यही उम्मीद है कि भविष्य में भी रामदेव सिंह देश के लिए मेडल जीतते रहेंगे। — ये खबर भी पढ़ें जयपुर में 19 साल के रोहन ने 3 जिंदगियां बचाई:परिवार ने किए किडनी-लिवर डोनेट; बाइक से घर लौटते समय ट्रेलर ने मारी थी टक्कर जयपुर में एक्सीडेंट के कारण ब्रेनडेड युवक मौत से पहले 3 लोगों को नई जिंदगियां दे गया। सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (SMS) के डॉक्टर्स की समझाइश के बाद परिवार ने युवक की किडनी-लिवर डोनेट कर दी। हालांकि, उन्होंने उसका हार्ट डोनेट करने से इनकार कर दिया। कॉलेज स्टूडेंट रोहन शर्मा (18) जयपुर के चौमूं का रहने वाला था। एसएमएस हॉस्पिटल में रविवार (31 अगस्त) सुबह ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया हुई। (पूरी खबर पढ़ें)


