पानीपत थाना साइबर क्राइम की टीम ने साइबर अपराधियों को ‘किराए’ या ‘कमीशन’ पर बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने राजस्थान के डीडवाना जिले से 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो भोले-भाले लोगों के खाते खुलवाकर उन्हें ऊंचे दामों पर साइबर ठगों को बेचते थे। मामले का खुलासा समालखा निवासी नरेश की शिकायत पर हुआ। नरेश को जून 2025 में वॉट्सएप पर ‘पार्ट टाइम जॉब’ का झांसा दिया गया था। टास्क पूरा करने और मुनाफा कमाने के लालच में नरेश से अलग-अलग किस्तों में कुल 13 लाख 75 हजार रुपए ठग लिए गए। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने अगस्त 2025 में साइबर थाने में मामला दर्ज कराया था। 10 हजार में खरीदकर 50 हजार में बेचते थे खाता साइबर सेल के प्रभारी सब इंस्पेक्टर अजय ने बताया कि जांच के दौरान नवंबर 2025 में सबसे पहले जितेंद्र नामक आरोपी को पकड़ा गया था, जिसके खाते में ₹7.11 लाख ट्रांसफर हुए थे। जितेंद्र से पूछताछ के बाद सुरेश और कमल के नाम सामने आए। रविवार को पुलिस ने सुरेश और कमल को डीडवाना से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वे स्थानीय लोगों से 10 से 15 हजार रुपए में बैंक खाते लेते थे और आगे अपने साथी विकास को यही खाते 50 हजार रुपए में बेच देते थे। पुलिस की कार्रवाई आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे ठगी की रकम को खपाने के लिए सुरक्षित बैंक खातों का नेटवर्क तैयार कर रहे थे। पुलिस ने सोमवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अब पुलिस इनके तीसरे साथी ‘विकास’ की तलाश में जुटी है।


