शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर निगम चुनाव को लेकर महज 72 घंटे बचे हुए हैं, लेकिन प्रशासन सेंसिटिव बूथों तक का चयन नहीं कर पाया है। बता दें कि 7 साल पहले हुए निगम चुनाव में 748 पोलिंग बूथों के लिए 118 पोलिंग स्टेशन हाइपर सेंसिटिव तो 156 सेंसिटिव थे। इस बार 85 वार्डों के लिए 841 बूथ बनाए गए हैं, जहां 942 ईवीएम लगाई जाएंगी। लेकिन किस आरओ को उनके अधीन आते वार्डों में ईवीएम दी गई इसका ब्योरा प्रशासन सार्वजनिक नहीं कर पाया है। हैरानी तो यह है कि निर्वाचन आयोग की तरफ से 5 दिन पहले चुनाव ऑब्जर्वर तैनात किए जा चुके है मगर हर बार की तरह चुनाव से जुड़ी तैयारियों का जायजा लेने के लिए न तो मीटिंग हुई ना ही वह डिटेल साझा करना जरूरी समझा गया। यहां तक कि आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन होने पर शिकायत कहां दर्ज कराई जाए इसके लिए कोई हेल्पलाइन नंबर व कंट्रोल रूमों तक का पता नहीं है। सूचना केंद्र अभी तक स्थापित नहीं किया जा सका है। वहीं एडीसी खुद इस चुनाव की इंचार्ज के तौर पर तैयारियां पूरी कराती हैं। लेकिन इस बार कराए जा रहे निगम चुनाव का हाल कुछ इस तरह रहा कि वोटरों को वोट डालने के लिए जागरूकता कार्यक्रम देखने को नहीं मिले। जिस तरह से चुनाव की तैयारियां होती रहीं मानो प्रशासन खानापूर्ति कर रहा है। कितने बूथ सेंसिटिव या हाइपर सेंसिटिव बनाए गए हैं। .कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन होने पर प्रत्याशी या आम लोग कहां शिकायत कर सकेंगे। .चुनाव ऑब्जर्वर का क्या नंबर है। उनसे अगर कोई शिकायत करनी है तो कैसे कर पाएंगे। .कोई कंट्रोल रूम या हेल्पलाइन नंबर जारी नहीं किया गया। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा तो तत्काल शिकायत के क्या इंतजाम हैं। .सूचना केंद्र कब तक खोला जाएगा। जहां से चुनाव से जुड़ी गतिविधियों के बारे कोई आसानी से जानकारी हासिल कर सकेगा। .यदि किसी के पास वोटर कार्ड नहीं है तो उसकी जगह पर मतदाता कौन से पहचान पत्र का इस्तेमाल कर सकेंगे। .बूथों से कितने दूर ही आम लोगों को रोक दिया जाएगा। बूथों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे या नहीं। अगर लगाए गए हैं तो कितने कुछ पता नहीं। .वोटरों को आकर्षित करने के लिए तैयारियां प्रशासन की ओर से क्या तैयारियां की गई हैं। इसके अलावा मतदान केंद्रों पर वोटरों के लिए क्या सुविधाएं रहेंगी उसकी कोई डिटेल पता नहीं है।


