धार स्थित भोजशाला मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां, सुझाव और सिफारिशें प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि एएसआई की रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी हैं और उसकी प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध करा दी गई हैं। ऐसे में रिपोर्ट को दोबारा कोर्ट के समक्ष अनसील करने की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देशित किया कि वे एएसआई की 98 दिन तक चली वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा, “कोर्ट के निर्देशानुसार हम दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।” अब 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में सभी पक्षों द्वारा दाखिल जवाबों पर विचार किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी। 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाई कोर्ट की इंदौर बेंच को तीन हफ्ते के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इससे पहले सर्वे के बाद की कानूनी प्रक्रिया पर कुछ समय के लिए रोक लगी थी। अब वह रोक हट चुकी है और रिपोर्ट पर सुनवाई का रास्ता साफ हुआ है। बता दें कि एमपी के धार स्थित भोजशाला परिसर विवाद मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से जबलपुर प्रिंसिपल बेंच में ट्रांसफर कर दिया था। पूजा के अधिकार बनाम नमाज की अनुमति से जुड़े इस संवैधानिक प्रकरण पर 18 फरवरी को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की और प्रकरण को वापस इंदौर बेंच ट्रांसफर कर दिया। इन हाईटेक तकनीकों से हुई जांच


