उच्च शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर वार करते हुए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) द्वारा देशभर में कुल 32 विवि को फर्जी घोषित कर दिया है। आयोग ने साफ किया है कि ये संस्थान न तो यूजीसी अधिनियम, 1956 के तहत स्थापित हैं और न ही इन्हें डिग्री देने का कोई वैधानिक अधिकार है। इन फर्जी विश्वविद्यालयों द्वारा जारी डिग्रियां अवैध मानी जाएंगी। इस सूची में झारखंड का भी एक विश्वविद्यालय शामिल है। आयोग ने छात्रों और अभिभावकों से कहा है कि ऐसे संस्थानों में एडमिशन लेने से पहले वेबसाइट पर मान्यता की स्थिति अवश्य जांच कर लें। यूजीसी समय-समय पर फर्जी विश्वविद्यालयों की लिस्ट जारी करता रहा है। इससे पहले पिछले साल यूजीसी द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यायलों की संख्या 24 थी। लेकिन अब बढ़कर 32 हो गई है। इस नजर रख रहे शिक्षकों का कहना है कि एडमिशन सीजन के दौरान ऐसे संस्थान सक्रिय हो जाते हैं और छात्रों को भ्रामक विज्ञापनों के जरिए आकर्षित करते हैं। यूजीसी की लिस्ट के अनुसार ये 32 फर्जी विश्वविद्यालय देश के 12 राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित हो रहे हैं। दिल्ली में सबसे अधिक 12 विवि फर्जी पाए गए हैं। वहीं झारखंड का एक विवि (दक्ष विश्वविद्यालय) इस सूची में शामिल है। जबकि अन्य राज्यों में भी एक से चार तक फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट में शामिल है। बताते चलें कि यूजीसी द्वारा हर हर साल फर्जी विवि की लिस्ट जारी कर स्टूडेंट्स और अभिभावकों को सचेत करता है।


