प्रत्याशी हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर अंतिम समय तक वोट की अपील करते नजर आए

गुमला|मतदान केंद्रों के ठीक बाहर का नजारा किसी मेले जैसा था। चुनाव मैदान में उतरे अध्यक्ष और वार्ड पार्षद पद के प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ डटे रहे। जैसे ही कोई मतदाता केंद्र की ओर बढ़ता, प्रत्याशी हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर अंतिम समय तक वोट की अपील करते नजर आए। प्रत्याशियों की नजरें हर आने-जाने वाले मतदाता के चेहरे के हाव-भाव पर टिकी थीं। मानो वे उनके मन की बात पढ़ने की कोशिश कर रहे हों। हार-जीत के समीकरणों के बीच प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिखे। वहीं केंद्रों के बाहर जगह-जगह लोगों का हुजूम लगा रहा। जो चुनावी चर्चा में मशगूल रहें। इस दौरान हर बूथों पर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी भी पहुंचे और अपनी स्थिति की जानकारी ली। गुमला|गुमला नगर परिषद चुनाव के तहत शहर की सरकार चुनने के लिए मतदाताओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। सुबह 7 बजे मतदान शुरू होने से पहले ही शहर के विभिन्न वार्डों में स्थित मतदान केंद्रों के बाहर महिला और पुरुष मतदाताओं की लंबी कतारें लग गई थीं। ठंड के हल्के असर के बावजूद लोकतंत्र के प्रति लोगों का जज्बा भारी रहा। नगर परिषद के कुल 22 वार्डों के लिए बनाए गए 44 मतदान केंद्रों पर सुबह से ही गहमागहमी रही। प्रमुख केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें परिसर से बाहर तक पहुंच गई थीं। जो मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। वहीं जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और हर केंद्र पर पुलिस बल की तैनाती थी। गुमला|नगर निकाय चुनाव के दौरान गुमला की गलियों में लोकतंत्र के प्रति अटूट आस्था देखने को मिली। इस बार मतदान का उत्साह केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं बल्कि पारिवारिक उत्सव के रूप में नजर आया। शहर के विभिन्न वार्डों में कई ऐसे परिवार दिखे। जिन्होंने घर के सभी सदस्यों के साथ एक टोली बनाकर बूथ तक का सफर तय किया। वोट डालने के बाद स्याही लगी उंगली के साथ पूरे परिवार ने सेल्फी भी ली। मतदाताओं का कहना था कि जब पूरा परिवार एक साथ वोट देने निकलता है, तो इससे आने वाली पीढ़ी को भी अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का महत्व समझ आता है। गुमला|मतदान के लिए बूथों में पहुंचने के बाद भी कई मतदाता मतदान नहीं कर पाए। वोटर आइडी व वोट देने के लिए अधिकृत दस्तावेज नहीं ले जाने के कारण मतदाताओं को लौटना पड़ा। हुआ ऐसा कि मतदाता तो मतदान केंद्र पहुंच गए। जहां मतदाताओं को मतदाता सूची से पर्ची भी दी गई। लेकिन मतदान के लिए प्रतिनियुक्त पदाधिकारी व कर्मी ने जब मतदाता से आइडी की मांग की तो, कई वोटर आइडी नहीं दिखा पाए। इस कारण उन्हें मतदान नहीं करने दिया गया। कई बूथों में इस प्रकार का मामला देखा गया। वहीं सुरक्षा और वोटिंग की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए केंद्र के अंदर मोबाइल ले जाने की भी अनुमति नहीं दी गई। बूथ पर मौजूद अधिकारियों ने इस बाबत कहा कि इससे चुनाव की गोपनीयता भंग होती है। सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाया गया है। इधर इस बार इस प्रकार की भी शिकायते सामने आई। जिसमें मतदाता सूची में नाम होने के बाद मतदाता को मृत करार दे दिया गया।

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