भास्कर न्यूज | चित्तरंजन रूपनारायणपुर के सीमांत पल्ली दुर्गा मंडप में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन पश्चिम बंगाल गणतांत्रिक लेखक-शिल्पी संघ, बाराबनी क्षेत्रीय समिति की ओर से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत 21 फरवरी की स्मृति में ऐक्यतान समूह के सामूहिक गीत से हुई, जिसने उपस्थित दर्शकों में भाषाई चेतना का संचार किया।भाषा आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर वक्ता भैरव चट्टोपाध्याय ने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मातृभाषा की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर संघ की पहल पर आयोजित कवि सुकांत भट्टाचार्य की जयंती के उपलक्ष्य में हुए सांस्कृतिक प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर उनकी प्रतिभा की सराहना की गई। कार्यक्रम में पौषाली, शतरूपा और श्रेयसी चक्रवर्ती ने प्रभावशाली आवृतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं नीलाद्रि सेन ने मधुर गायन प्रस्तुत किया, जिसमें तबले पर देवव्रत भंडारी ने संगत दी। समारोह का समापन बलाका शिल्पी संस्था के सामूहिक संगीत के साथ हुआ। पूरे आयोजन में साहित्य, संगीत और संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने मातृभाषा दिवस को सार्थक और यादगार बना दिया।


