कोरिया जिला मुख्यालय स्थित जिला ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में पहल की गई है। जिला स्वास्थ्य समिति कोरिया, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ और एकम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में जिले में पहली बार रोगी सहायता समूह की शुरुआत की गई। इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य सिकल सेल जैसे गैर-संचारी रोगों से जूझ रहे बच्चों और उनके अभिभावकों को एक ऐसा साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी चुनौतियों को साझा कर सकें और समाधान पा सकें। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कलेक्टर चंदन त्रिपाठी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह आयोजन केवल एक औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संवाद और भरोसे का केंद्र बन गया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 44 सिकल सेल पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों ने इसमें हिस्सा लिया। परिजनों ने अपने संघर्षों को साझा किया, जिससे अन्य परिवारों को संबल मिला। कार्यशाला में मौजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सिकल सेल को एक गंभीर आनुवांशिक रक्त विकार बताया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विवाह से पहले सिकलिंग टेस्ट कराना सबसे प्रभावी निवारक उपाय है। विशेषज्ञों ने हाइड्रॉक्स्यूरिया जैसी दवाओं के लाभ बताए और नियमित चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता पर जोर दिया। समय पर पहचान और उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित कर सामान्य जीवन जिया जा सकता है। एक अभिभावक ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके बच्चे को पहले बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता था, लेकिन नियमित चिकित्सकीय सलाह और दवाइयों के सेवन से अब उसकी स्थिति में काफी सुधार आया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि भारत में गैर-संचारी रोगों से हर वर्ष बड़ी संख्या में मौतें होती हैं, जिनमें सिकल सेल एक बड़ी चुनौती है, जिसे सामुदायिक सहयोग से ही कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान मरीजों को सिकल सेल प्रमाण पत्र वितरित किए गए और शासन द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सुविधाओं व योजनाओं की जानकारी दी गई। इससे परिजनों में यह विश्वास जगा कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है। आगामी समय में भी यह रोगी सहायता समूह नियमित बैठकों के माध्यम से परामर्श और मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा।


