भास्कर न्यूज | अंबिकापुर उच्च शिक्षा को आधुनिक तकनीक और वैश्विक मानकों से जोड़ने की दिशा में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को विश्वविद्यालय के सिटी ऑफिस (रविंद्र नाथ टैगोर भवन) में कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले की अध्यक्षता में एआई व क्वांटम इंजीनियरिंग के व्यावहारिक व सामाजिक उपयोग पर बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग (यूटीडी) के सभी शिक्षकों को अपने पाठ्यक्रमों में एआई को समाहित करने के निर्देश दिए। बैठक में कुलपति प्रो. लाकपाले ने जोर देकर कहा कि शिक्षण विभाग अब अपने पाठ्यक्रम तैयार करने में अधिक से अधिक भारतीय एआई सॉफ्टवेयर का उपयोग करेंगे। उन्होंने भाषिणी, बोधन और गुरुसेतु जैसे स्वदेशी एआई टूल्स का उल्लेख करते हुए बताया कि इनके उपयोग से न केवल हमारे शैक्षणिक डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा बनी रहेगी, बल्कि इसके गलत इस्तेमाल को भी रोका जा सकेगा। कुलपति ने भविष्य की अर्थव्यवस्था यानी ऑरेंज इकोनॉमी (क्रिएटिव इकोनॉमी) के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी एआई का सदुपयोग कर इसे अपने जीवकोपार्जन का साधन बना सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए जो न केवल ज्ञानवर्धक हो, बल्कि रोजगार मूलक भी हो, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। बैठक के दौरान कम्प्यूटर साइंस विभाग के सहायक प्राध्यापक हरिशंकर प्रसाद तोडें ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से एआई की कार्यप्रणाली और उच्च शिक्षा में नवाचार के लिए इसके उपयोगों की जानकारी दी। बैठक में विश्वविद्यालय के सभी वरिष्ठ शिक्षक और पदाधिकारी उपस्थित रहे। संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी के यूटीडी में अलग-अलग सात विभाग संचालित हैं। इसमें कम्प्यूटर साइंस, बायो टेक्नालाजी, पर्यावरण साइंस, विधि, फार्मेंसी, फार्म फारेस्ट्री व प्रयोजन मूलक हिंदी शामिल हैं। इन विभागों में फार्म फारेस्ट्री में 30 व बाकी के विभागों में 20-20 सीटें हैं। इन विभागों द्वारा एआई समावेशी पाठ्यक्रम बनाया जाएगा। ये पाठ्यक्रम ऐसा होगा जो रोजगार मूलक हों, जिससे कि भारतीय अर्थ व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद कर सकें। एआई आधारित पाठ्यक्रम से रोजगार पर फोकस


