भाजपा, झामुमो व कांग्रेस ने किए समर्थित प्रत्याशियों की जीत के दावे

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने दावा किया है कि नगर निकाय चुनाव में वोटर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के साथ खड़े रहे। अधिकतर सीटें जीतेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि, कार्यकर्ताओं से मिली रिपोर्ट के अनुसार, जनता का रुझान पूरी तरह भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में दिखाई दिया है। सोमवार को प्रेस वार्ता में आदित्य साहू ने कहा कि मतगणना को प्रभावित करने की कोशिश हुई, तो भाजपा कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित कराए। प्रेस वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद, प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक भी थे। रांची में कांग्रेस पहले नंबर पर : कमलेश प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने निकाय चुनाव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राजधानी रांची में मेयर के चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलखो पहले नंबर पर हैं। इसके अलावा राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी लड़ाई में मौजूद हैं। अधिकांश जगहों पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों की ही जीत होगी। बोगस वोटिंग कराने का भी आरोप आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में बोगस मतदान की सूचनाएं मिली हैं। मेदिनीनगर के वार्ड नंबर 6 के बूथ 3 व 4, वार्ड नंबर 5 के बूथ 2 और 3 पर बोगस वोटिंग कराई गई। गढ़वा के वार्ड नंबर 20 में भाजपा समर्थक वोटरों को भगाया गया। 9 निगम में से दो तिहाई पर जीतेंगे : सुप्रियो ​नगर निकाय चुनाव में छिटपुट घटना को छोड़कर शांतिपूर्ण मतदान पर झामुमो ने राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य प्रशासन एवं झारखंड पुलिस का आभार प्रकट किया। पार्टी के केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि गांव के बाद अब शहर में भी भाजपा का सफाया हो गया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के नौ नगर निगम में एक से दो तिहाई पर झामुमो समर्थित उम्मीदवारों का कब्जा होगा। ट्रिपल टेस्ट और ओबीसी आरक्षण के बाद जिस तेजी से राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तैयारी की, वह सराहनीय है। अव्वल देशों में भी बैलेट से चुनाव उन्होंने भाजपा एवं उनके केंद्रीय मंत्री के द्वारा बैलेट पेपर चुनाव पर की गयी टिप्पणी पर भी पलटवार किया। कहा कि ऐसे लोगों को याद रखना चाहिए कि जापान, कोरिया, अमेरिका जैसे टेक्नोलॉजी में अव्वल देशों में भी बैलेट पेपर से चुनाव हो रहे हैं।

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