दोपहर को मौसम ने ली करवट, फसलों को नुकसान:प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र में ओले, कई शहरों में हल्की बारिश; 4 डिग्री तक गिरा पारा

छत्तीसगढ़ में सोमवार को मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह तक सामान्य दिख रहा आसमान दोपहर बाद कई जिलों में बादलों से ढक गया। राजधानी रायपुर में करीब 12 बजे के बाद बादल छाए और हल्की बूंदाबांदी हुई। बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में भी धूप कमजोर पड़ी और बादलों की आवाजाही बढ़ी। उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा-अंबिकापुर क्षेत्र में तेज गरज-चमक के साथ कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की खबर है। पिछले कुछ दिनों से तापमान 33 से 35 डिग्री के आसपास पहुंच रहा था। सोमवार को अचानक बदले मौसम बदलने और हल्की बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली। रायपुर में अधिकतम 27.7 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 4 से 5 डिग्री सेल्सियस कम है। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री तक पहुंच गया, जिससे सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस की गई। जगदलपुर में प्रदेश का सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री दर्ज हुआ, लेकिन वहां भी बादलों के कारण तपिश कम रही। बलरामपुर के वाड्रफनगर में आधे घंटे तक गिरे ओले, 10 सेंटीमीटर मोटी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई
सरगुजा संभाग में सोमवार को मौसम के बदले मिजाज ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर और आसपास के इलाकों में शाम को करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि हुई। ओलों के कारण देखते ही देखते जमीन पर 10 सेंटीमीटर मोटी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। सब्जी और फसलों को नुकसान
ओलावृष्टि से फसलों और सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ है। खेतों में पककर तैयार हो रही गेहूं और सरसों की बालियां ओला गिरने से टूटकर गिर गई हैं। सबसे बुरा असर सब्जियों की खेती पर पड़ा है। टमाटर, गोभी और मिर्च की फसलें नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा, आम और लीची के पेड़ों पर आए बौर (फूल) भी झड़ गए हैं। वाड्रफनगर विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में ओलावृष्टि इतनी तीव्र थी कि सड़कों और खेतों में सिर्फ बर्फ ही बर्फ नजर आ रही थी। किसान अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को जमींदोज होते देख हताश हैं। हालांकि, अभी तक नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जिन खेतों में पानी जमा है, वहां निकासी की व्यवस्था करें और गिरी फसल को सहारा दें। बदलते मौसम का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखा। बाजारों में दोपहर की भीड़ कुछ कम रही, हालांकि तापमान गिरने से लोगों ने राहत महसूस की। डॉक्टरों का कहना है कि दिन-रात के तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण बढ़ सकते हैं। ऐसे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतनी चाहिए। आगे: एक-दो दिन हल्की बारिश के संकेत
मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 48 घंटों में प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रह सकती है। अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री और गिरावट के बाद फिर धीरे-धीरे बढ़ोतरी की संभावना है। यानी यह बदलाव अस्थायी है, लेकिन मार्च की दस्तक से पहले मौसम विभाग ने राहत और सतर्कता, दोनों के संकेत दिए हैं। मंगलवार को राजधानी रायपुर में भी दिन में हल्के बादल रहेंगे। दिन का तापमान 28 और रात में पारा 20 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। इन तीन वजहों से आया मौसम में बदलाव 1. बंगाल की खाड़ी में मजबूत कम दबाव: दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का मजबूत क्षेत्र बना हुआ है। ऐसे सिस्टम में हवा तेजी से उस इलाके की ओर खिंचती है और ऊपर तक (करीब 5 से 6 किमी ऊंचाई) बादल बनने की स्थिति बनती है। यह सिस्टम अगले 48 घंटों तक सक्रिय रह सकता है।
2. नमी लाने वाली ट्रफ लाइन: इस लो-प्रेशर से एक ट्रफ (हवा और नमी की लंबी पट्टी) तमिलनाडु, कर्नाटक होते हुए दक्षिण महाराष्ट्र तक फैली है। यह जमीन से करीब 1 किमी ऊपर सक्रिय है। इसी से बादल बढ़ रहे हैं और हल्की बारिश की स्थिति बन रही है।
3. ऊपरी हवा में हलचल: ऊपर से ठंडी हवा और नीचे से आ रही नमी मिलकर मौसम को अस्थिर बना रही है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ समेत आसपास के क्षेत्रों में अचानक बादल छा गए।

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