आगे बड़ी-बड़ी पताकाएं, पीछे माईजी की डोली फागुन मंडई में निभाई गई ताड़ पलंगा धोनी रस्म

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा फागुन मेले के दूसरे दिन सोमवार को दन्तेश्वरी माता की द्वितीय पालकी निकली। रविवार रात को ताड़ पत्तों को दन्तेश्वरी सरोवर में धोया गया, अब इसी से होली जलेगी। फागोत्सव के रूप में शक्तिपीठ दंतेश्वरी मन्दिर दंतेवाड़ा का फागुन मेला आयोजित होता है, जो होली तक चलता है। इस बार आयोजन की शुरुआत 22 फरवरी से हुई है। इसमें लोक संस्कृति के विविध रंगों के साथ ही उत्सवधर्मी रचनात्मकता के भी दर्शन होते हैं। यह मेला फागुन शुक्ल सप्तमी से भरता है। इस दौरान पूरे 9 दिनों तक रोजाना देवी दंतेश्वरी और मावली माता की पालकी मंदिर से निकलकर नारायण मंदिर तक जाती है। उनके आगे देवी-देवताओं के छत्र और लंबे बांस पर लगी ध्वजा-पताकाएं लेकर ग्रामीण चलते हैं और उनके साथ में फाग गायन करती मंडलियां भी चलती हैं।

मेले में होलिका दहन व रंग-भंग का आयोजन भी अपने आप में विशिष्टता लिया हुआ है। इस होलिका दहन में लकड़ियां नहीं, बल्कि ताड़ के पत्तों की होलिका सजाई जाती है। इसके दहन के बाद राख से तिलक कर अगली सुबह रंग-भंग की रस्म पूरी करते हैं। 4 मार्च को बड़ा मेला, प्रशासन जुटा तैयारियों में द्वितीय पालकी के बाद अब आखेट का स्वांग भी सोमवार की रात से शुरू होगा, 4 मार्च को मेला भरेगा। इस दिन देवी दंतेश्वरी के साथ आमंत्रित देवी-देवता नगर परिक्रमा करते हैं।

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