खेल मैदान पर कांक्रीट का कब्जा, हेलीपेड निर्माण के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

ग्राम पंचायत बड़े बचेली के हाई स्कूल मैदान में बनाए जा रहे कांक्रीट हेलीपेड के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सरपंच गोविंद कुंजाम, उपसरपंच महेश ठाकुर और जनप्रतिनिधि बलराम भास्कर की अगुआई में ग्रामीणों ने मैदान पहुंचकर निर्माण कार्य तत्काल बंद करने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के एकमात्र खेल मैदान में बिना ग्रामसभा की अनुमति, बिना पूर्व सूचना और बिना जनप्रतिनिधियों की सहमति के कांक्रीट बेस डालकर हेलीपेड तैयार किया जा रहा है। यह वही मैदान है जहां स्कूल के बच्चे खेलते हैं और आसपास के गांवों के युवा क्रिकेट, फुटबॉल व अन्य खेल गतिविधियां करते हैं। भविष्य में इसी मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित करने की योजना भी बताई जा रही थी। सरपंच गोविंद कुंजाम ने प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि हेलीपेड सरकारी जमीन पर कहीं भी बनाया जा सकता है, लेकिन खेल के मैदान के बीचों-बीच कांक्रीट ढांचा खड़ा करना पूरी तरह गलत है। उनका कहना है कि वर्षों से हेलीकॉप्टर एनएमडीसी टाउनशिप के फुटबॉल ग्राउंड में अस्थायी रूप से उतरते रहे हैं, कभी कोई समस्या नहीं हुई। फिर अचानक हाईस्कूल मैदान में स्थायी कांक्रीट हेलीपेड बनाने की जरूरत क्यों पड़ी ? ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मैदान के कुछ हिस्सों में निजी भूमि भी शामिल है, मैदान आसपास के निजी आवासीय भूमि से घिरा हुआ है जिसके बावजूद बिना चर्चा और बिना सहमति के कार्य शुरू कर दिया गया। मौके पर सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। स्थिति को देखते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया। ग्रामीणों का साफ संदेश है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है। खेल के मैदान को कांक्रीट में बदलने की कोशिश ने पूरे क्षेत्र में असंतोष की चिंगारी जला दी है, जो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन बन सकता है। ग्रामसभा की अनदेखी कर काम करने से भड़का आक्रोश प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जोरदार नारे लगाए न लोकसभा, न विधानसभा सबसे बड़ी ग्रामसभा। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा की अनदेखी कर और जनप्रतिनिधियों को अंधेरे में रखकर कार्य किया जा रहा है, जिससे गांव में भारी नाराजगी है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्माण कार्य तुरंत बंद कर मैदान को पूर्व की भांति समतल नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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