टोंक की बेगमों की मदीना वाली रुबातों में हज यात्रियों का फ्री ठहरना अटका, ​उठाई आवाज

भास्कर संवाददाता | टोंक टोंक रियासत की बेगमों द्वारा करीब 130 वर्ष पूर्व मक्का और मदीना (सऊदी अरब) में बनवाई गई ऐतिहासिक रुबातों (धर्मशालाओं) में हज यात्रियों के नि:शुल्क ठहरने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस वर्ष मक्का की रुबातों के लिए तो हरी झंडी मिल गई है, लेकिन मदीना की रुबातों में मुफ्त ठहरने की व्यवस्था पिछले तीन वर्षों की तरह इस बार भी प्रशासनिक अड़चनों में फंसी हुई है। हैरानी की बात यह है कि राजस्थान के स्थानीय मंत्रियों, सांसदों और विधायकों ने इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, जबकि मध्य प्रदेश के विदिशा से सांसद और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे गंभीरता से लिया है। ऐतिहासिक रूप से टोंक रियासत का हिस्सा रहे सिरोंज (विदिशा) के हज यात्रियों की सुविधा के लिए चौहान ने संबंधित केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर मदीना की रुबातों में नि:शुल्क प्रवास बहाल करने का आग्रह किया है। मदीना रुबात ऑथोरिटी से जुड़े राहिल खान ने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू को भी ज्ञापन दिया गया है। टोंक रियासत के अधीन आने वाले क्षेत्रों जैसे छबड़ा, पिड़ावा, निम्बाहेड़ा और सिरोंज के हाजियों को इन रुबातों में प्राथमिकता के आधार पर निशुल्क ठहरने की सुविधा मिलती रही है। अनुमति न मिलने के कारण हाजियों को वहां भारी शुल्क चुकाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। क्या है रुबात और क्यों है इनका महत्व? इतिहास: टोंक की बेगमों ने सवा सौ साल पहले हज यात्रियों की सुविधा के लिए मक्का-मदीना में करोड़ों की संपत्ति दान कर ये धर्मशालाएं बनवाई थीं। विरासत: ये रुबातें टोंक की गंगा-जमुनी तहजीब और रियासतकालीन सेवा भाव का प्रतीक हैं। सुविधा: इनमें रियासत के पुराने क्षेत्रों (राजस्थान व एमपी के हिस्से) के हाजियों को मुफ्त ठहरने का अधिकार है। संकट: मदीना की रुबातों में तकनीकी और कूटनीतिक कारणों से पिछले 3 साल से अनुमति नहीं मिल पा रही है।

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