मोबाइल एप पर 3 से 7 दिन का फ्री ट्रायल या मात्र 1 रुपए में सर्विस का ऑफर देखकर ‘आई एग्री’ पर क्लिक करना कई लोगों को भारी पड़ रहा है। शहर में हजारों लोग ऐसे सब्सक्रिप्शन ट्रैप का शिकार हो रहे हैं, जहां एक बार अनुमति देने के बाद हर महीने बैंक खाते से पैसे कटने लगते हैं। लोगों को लगता है कि एप डिलीट कर देने से समस्या खत्म हो जाएगी, जबकि असल में सब्सक्रिप्शन बैंक, प्ले-स्टोर या पेमेंट प्लेटफॉर्म के स्तर पर सक्रिय रहता है। पीड़ित जब बैंक पहुंचते हैं तो इसे अधिकृत ट्रांजेक्शन बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है। साइबर थाने में भी कई मामलों को तकनीकी चूक मानकर गंभीरता से नहीं लिया जाता। लालच में फंस रहे पढ़े-लिखे
फेसबुक, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देकर एप स्टोर पर 1 से 7 दिन का फ्री ट्रायल या नाममात्र शुल्क का लालच दिया जाता है। अधिकांश लोग शर्तें पूरी तरह पढ़े बिना ‘आई एग्री’ पर क्लिक कर देते हैं। इसी अनुमति के साथ कंपनियां रेकरिंग पेमेंट या ऑटो-डेबिट एक्टिवेट कर लेती हैं। इसके बाद हर महीने बिना अलग से सूचना दिए राशि कटती रहती है। तीन दिन फ्री, फिर हर माह 899 रुपए काटना शुरू केस 1 – शास्त्री नगर निवासी राहुल ने एक फोटो एडिटिंग एप का 3 दिन का फ्री ट्रायल लिया। ट्रायल खत्म होने के बाद बिना किसी ओटीपी या मैसेज के उनके खाते से हर महीने 899 रुपए कटने लगे। एप डिलीट करने के बाद भी कटौती जारी रही। केस 2 – निजी कंपनी में कार्यरत प्रिया ने एक योगा एप पर 1 रुपए का ऑफर देखा। कार्ड डिटेल दर्ज करते ही सातवें दिन ‘एनुअल मेंबरशिप’ के नाम पर 4500 रुपए खाते से कट गए। बैंक और साइबर थाने के चक्कर लगाने के बाद भी रकम वापस नहीं मिली। भास्कर एक्सपर्ट – मुकेश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट एप डिलीट करना समाधान नहीं, ये तरीके आजमाए


