राजस्थान में प्राइवेट बसों की हड़ताल का असल झुंझुनूं में भी देखने को मिला है। यहां प्राइवेट बसों के ऑफिस के सामने सन्नाटा पसरा है। वहीं इस मौके पर टैक्सी ड्राइवर यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। ऐसे में, सारा भार रोडवेज बसों पर आ गया है। सभी बसें खचाखच भरी हैं। मंगलवार रात 12 बजे से ही निजी बसों के पहिए थम गए हैं, जिसके कारण जिले की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। झुंझुनूं का मुख्य निजी बस स्टैंड ‘पीरू सिंह सर्किल’, जो चौबीसों घंटे यात्रियों की आवाजाही से गुलजार रहता था, आज पूरी तरह सुनसान नजर आ रहा है। लंबी दूरी के यात्रियों को परेशानी हड़ताल का सबसे गंभीर असर उन यात्रियों पर पड़ा है जो जयपुर, सूरत, अहमदाबाद और दिल्ली जैसे लंबी दूरी के शहरों के लिए प्रस्थान करने वाले थे। झुंझुनूं से रोजाना करीब 55 स्लीपर बसें गुजरात और अन्य राज्यों के लिए रवाना होती हैं, जो फिलहाल पूरी तरह बंद हैं। सीधा असर उन प्रवासियों और व्यापारियों पर पड़ा है जिन्हें व्यापारिक कार्यों के लिए आज निकलना था। रोडवेज बसों पर बढ़ा दबाव निजी बसों के बंद होने से सारा भार राजस्थान रोडवेज की बसों पर आ गया है। स्थिति यह है कि रोडवेज की बसें क्षमता से अधिक सवारियां (ओवरलोड) भरकर चल रही हैं। जयपुर जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि लोक परिवहन की बसें बंद होने से रोडवेज की बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। झुंझुनूं से थमे इन प्रमुख रूटों के पहिए निजी बस एसोसिएशन के अनुसार, जिले से संचालित होने वाली सैकड़ों बसों का संचालन पूरी तरह ठप है। 55 स्लीपर बसें: जो सूरत, अहमदाबाद और दिल्ली जैसे लंबे रूटों पर चलती हैं। 58 लोक परिवहन बसें: पिलानी-जयपुर रूट पर। 15 बसें: झुंझुनूं-जयपुर (वाया उदयपुरवाटी)। 13 बसें: खेतड़ी-झुंझुनूं मार्ग पर। 10 बसें: खेतड़ी से बीकानेर के लिए। 10 बसें: झुंझुनूं से दिल्ली के लिए। 08 बसें: झुंझुनूं-चिड़ावा लोकल रूट पर। टैक्सी वाले मनमाना किराया वसूल रहे निजी बस एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश गजराज ने बताया कि झुंझुनूं से संचालित होने वाली सभी लोक परिवहन और स्लीपर बसें पूर्ण रूप से बंद रखी गई हैं। हमारी मांगों के समर्थन में यह निर्णय लिया गया है। जब तक उचित समाधान नहीं होता, तब तक संचालन बंद रहेगा। पीरू सिंह सर्किल पर अपने परिवार के साथ खड़े यात्रियों का कहना है कि उन्हें हड़ताल की पूर्व सूचना नहीं थी। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्री बस स्टैंड पहुंच रहे हैं, लेकिन बसें न मिलने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई यात्री निजी टैक्सियों का सहारा ले रहे हैं, जो मनमाना किराया वसूल रही हैं।


