भास्कर न्यूज | अंबिकापुर शहर में एक निर्माण कंपनी के भागीदारों ने साजिश कर अपने ही साझेदार को कंपनी से बाहर कर दिया और संपत्ति हड़पने की कोशिश की। भागीदारों ने अपने साझेदार से करीब 2.30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है। धोखाधड़ी करने भागीदारों ने अपने साझेदार को बिना बताए ही कंपनी का दोबारा पंजीयन करा लिया और उसे फर्म से बाहर कर दिया। इसके बाद खाते से 2 करोड़ 30 लाख रुपए निकाल लिए। पुलिस ने बताया कि आवेदक ने कंपनी के कारोबार के लिए बाजार से करीब 2 करोड़ 30 लाख रुपए का सामान लिया था। इसका भुगतान करने उसने साझेदारों से बात की तो उन्होंने ये कहकर राशि का भुगतान करने से मना कर दिया कि बाजार से कर्ज आप ने लिया है, तो इसका भुगतान आप ही करो। उन्होंने फर्म से बाजार की उधार की राशि देने से बचने कंपनी का दोबारा पंजीयन कराया और इसमें आवेदक को शामिल नहीं किया। इसको लेकर आवेदक शिवशंकर तिवारी ने कोर्ट में प्रतिवाद पेश किया था। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने चन्द्र किशोर तिवारी, अतुल तिवारी निवासी नगर निगम कार्यालय के पास केदारपुर अंबिकापुर, आलोक तिवारी निवासी उदयान पथ चौबे कॉलोनी रायपुर व आरती देशमुख के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि शिवशंकर तिवारी ने जब भागीदारों से उधारी चुकाने के लिए रकम मांगी, तो उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद शिवशंकर ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, रायपुर में कंपनी के खाते होल्ड करा दिया। 10 जुलाई 2024 को चंद्र किशोर तिवारी, अतुल तिवारी, आलोक तिवारी और आरती देशमुख ने अंबिकापुर उप-पंजीयक कार्यालय में फर्जी दस्तावेज तैयार कर कंपनी का पुनर्गठन कराया और शिवशंकर तिवारी को हिस्सेदारी से बाहर कर दिया। प्रार्थी ने पहले सिटी कोतवाली में शिकायत की थी मेसर्स तिवारी कंस्ट्रक्शन नामक फर्म 2013 में पंजीकृत हुई थी। इसमें चंद्र किशोर तिवारी, अतुल तिवारी, आलोक तिवारी और आरती देशमुख साझेदार थे। 2017 में नोटरी पत्र के जरिए शिवशंकर तिवारी को कंपनी के वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी दी गई। समय के साथ कंपनी का टर्नओवर बढ़ा। इसके बाद बाजार से करीब 2.3. करोड़ रुपए की निर्माण सामग्री उधार ली गई। बता दें कि फर्जीवाड़े की शिकायत पहले थाना कोतवाली, अंबिकापुर में की गई थी। पुलिस ने इसे “अहस्तक्षेप योग्य मामला’ बताकर कोर्ट जाने की सलाह दी। इसके बाद शिवशंकर तिवारी ने न्यायालय में याचिका दायर की।


