मां अहमदाबाद में एडमिट, बेटा उदयपुर में अटका:प्राइवेट बसों की हड़ताल, रात में उदयापोल पर सोए ट्रैवल एसोसिएशन पदाधिकारी

प्राइवेट बसों और टैक्सियों की हड़ताल से पैसेंजर्स परेशान हो गए। उदयपुर में बीती रात से सभी बसें थम गई। सड़कों पर दौड़ने वाली बसें आज उदयपुर शहर के बस सेंटर पर खड़ी रही। बसों के नहीं चलने से यात्री परेशान हुए और रोडवेज बस और रेलगाड़ियों से यात्रा की। उदयपुर-अहमदाबाद नेशनल हाइवे पर कुछ बसों के सवारियां लेकर जाने की सूचना मिली तो ट्रैवल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वहां जाकर बसें खाली कराई। उदयपुर में ट्रैवल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उदयपुर के उदयापोल स्थित तोप के सामने ही तंबू लगाकर धरना दिया। ये पदाधिकारी रात को वहीं सोए और अपने आंदोलन को लेकर दिन भर वहीं बैठे।
बस स्टैंड के बाहर खड़े उदयपुर के मावली से आए शकील ने बताया कि माँ अहमदाबाद में भर्ती है। वहां जाने के लिए बस में मेरी सीट बुक थी और आज गांव से यहां आया तो बस संचालक ने पैसा वापस दे दिया कि हड़ताल है बस नहीं जाएगी। मै सुबह 6 बजे से खड़ा हूं। पारस सिंघवी-अधिकारी सरकार की बदनामी का षड्यंत्र रच रहे
उदयपुर में ट्रैवल एसोसिएशन के अध्यक्ष पारस सिंघवी ने दैनिक भास्कर से कहा कि निजी बस संचालकों को जिस तरह से परेशान किया जा रहा है उसकी हम निंदा करते हैं। सिंघवी ने कहा कि कुछ अधिकारी सरकार को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। सिंघवी ने कहा कि परिवहन विभाग ने जिन बसों का रजिस्ट्रेशन किया उन्हीं बसों के परमिट निरस्त करने से लेकर सवा लाख रुपए के चालान बनाने का काम किया जा रहा है, जो सरासर गलत। अब्दूल सलाम-यूपी का टैक्स 7000 और राजस्थान का 40 हजार
एसोसिएशन के डा. अब्दूल सलाम खान ने कहा कि सारा मामला टैक्स से जुड़ा है। उत्तरप्रदेश का टैक्स 7000, मध्यप्रदेश और गोवा में 3500-3500, अरुणाचल और नागालेंड का 1000-1000 और हमे राजस्थान में यह टैक्स 40,000 हजार रुपए देना पड़ रहा है। पड़ौसी राज्य से बढ़ाकर हमारा टैक्स 10 हजार कर दें लेकिन 40 हजार हम दे रहे है तो धंधा कैसे हो रहा है यह हर गाड़ी मालिक जानता है। हमारी सरकार से मांग है कि टैक्स पर हमारी मांग को पूरा करें। ऋषभ जैन – हमे दबाया जा रहा है
उदयपुर टूरिस्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ऋषभ जैन ने कहा कि हमारी जायज मांग को पूरा किया जाए। सरकार के अधिकारी बस मालिकों के लिए नित नए नियम बनाए जा रहे है। सरकार ने जो कहा वो हमने मान लिया और बसों को उनके अनुरुप कर दिया लेकिन छोटी-छोटी बातों पर दबाया जा रहा है जो ठीक नहीं है।

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