डीडवाना में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत कृषि सखी का पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र मौलासर में 20 से 24 फरवरी तक चले इस कार्यक्रम में प्रतिदिन 100 से अधिक कृषि सखियों ने भाग लिया और प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक हरिओम सिंह राणा ने बताया कि प्रशिक्षण के दूसरे और तीसरे दिन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अर्जुन सिंह ने प्राकृतिक खेती के मूल सिद्धांतों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बीजामृत, जीवामृत और जैविक पोषण प्रबंधन जैसे विषयों पर जानकारी साझा की। डॉ. सिंह ने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके खेती की लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के तरीकों को समझाया। इसी क्रम में कृषि अधिकारी पी.डी. चौधरी ने नई और उच्च मूल्य वाली फसलों की उन्नत खेती तकनीकों पर प्रकाश डाला। मोहन राम बाना ने फसलों के संतुलित पोषण प्रबंधन पर व्याख्यान दिया, जिससे प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली। प्रशिक्षण के चौथे दिन कृषि सखियों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर ले जाया गया। दो बसों में 100 से अधिक कृषि सखियों ने विश्वविद्यालय में प्राकृतिक खेती के मॉडल, अनुसंधान कार्यों और प्रयोगात्मक तकनीकों का अवलोकन किया। इस अवसर पर डॉ. दिनेश जाजोरिया ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। पांचवें और अंतिम दिन डॉ. अर्जुन सिंह ने समापन व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर कृषि विस्तार, डीडवाना-कुचामन के संयुक्त निदेशक हरिओम सिंह राणा ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कृषि सखियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए। इस दौरान सहायक निदेशक कमलेश कुमार, कृषि अधिकारी पी. डी. चौधरी, रमेश बेनीवाल, बजरंग लाल मीणा और मोहन लाल बाना भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के सफल आयोजन में कनिष्ठ अभियंताओं महेश भगत, वैभव दाधीच, चंदू जांगिड़ और अभिषेक सिंह ने व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और महिला कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।


