प्रदेश बजट में सरकार की ओर से उदयपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ माइंस खोले जाने की घाेषणा के बाद खान विभाग ने इसकी स्थापना काे लेकर कवायद तेज कर दी है। विभाग की ओर से महाराणा प्रताप कृषि एवं प्राैद्याेगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के सीटीएई काॅलेज में खनन से जुड़ा एक्सीलेंस सेंटर विकसित करने की योजना है। यहां आईआईटी रूड़की, धनबाद जैसे संस्थानाें की एक्सपर्ट टीम की मदद से एआई, डेटा एनालिसिस और खनन में आई नई तकनीकाें के बारे में सिखाया जाएगा। खान विभाग के निदेशक दीपक तंवर ने बताया कि काॅलेज में जमीन लेकर यह सेंटर विकसित किया जाएगा। यहां पहले से एक्सपर्ट, विद्यार्थी माैजूद हैं। बाहर से एक्सपर्ट की टीम काे बुलाया जाएगा। माइनिंग के नए शाॅर्ट टर्म काेर्स शुरू किए जाएंगे। इंजीनियरिंग के बाद विद्यार्थी सीधे यहीं से काेर्स कर सकेंगे। सेंटर बनने से जिन मिनरल्स का उपयाेग नहीं हाे रहा, उन पर रिसर्च हाेगी। मिनरल्स काे लेकर दुनियाभर में जारी ट्रेंड काे देखा जाएगा। इसके साथ मिनरल्स का ज्यादा ज्यादा उपयाेग हाे, इस पर फाेकस किया जाएगा। फायदे… मिनरल्स का डवलपमेंट हाेगा, रोजगार के नए अवसर मिलेंगे सीटीएई कॉलेज में 1957 से माइनिंग इंजीनियरिंग करवा रहे सीटीएई काॅलेज में वर्ष 1957 से माइनिंग विभाग संचालित है। हर साल 26 विद्यार्थी माइनिंग इंजीनियरिंग कर पास आउट हाेते हैं। यहां माइनिंग में बीटेक, एमटेक, पीएचडी, रिसर्च, कन्सलटेंट आदि के काेर्स करवाए जाते है। देश में हार्ड राॅक माइनिंग की पढ़ाई के लिए सीटीएई काे सबसे बेस्ट काॅलेज कहा जाता है। सरकार भी विशेषज्ञों से मिनरल्स की जांच कराएगी सरकार ने बजट में खनिजाें की खाेज के लिए राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (आरएसएमएम) की सहायक कंपनी राजस्थान माइंस एंड एक्सप्लोरेशन लिमिटेड का गठन किया। इसके जरिये सरकार खुद विशेषज्ञाें से मिनरल्स की जांच करवाएगी। इससे आंकड़े मिलने के साथ ही मिनरल्स की उचित नीलामी और माइनिंग हाे सकेगी। इसके साथ ही जमीनाें में माैजूद मिनरल्स का सही आकलन हाे सकेगा। अभी सरकार के पास रिसर्च के लिए डेडिकेटेड अलग से काेई टीम नहीं है।


