कंधों पर लाए कांवर, आज करेंगे भगवान शिव जी का अभिषेक शहर के शिवालयों में 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। भगवान शिव के अभिषेक के लिए गंगाजल भरने सौरों, हरिद्वार और अन्य स्थानों पर गए कांवडिय़ों के जत्थे वापस लौट आए हैं। कई मील का सफर पैदल तय करने के बाद कांवडि़ए अपनी मनौती वाले शिवालयों में पहुंचकर शिवजी का गंगाजल से अभिषेक करेंगे। महाशिवरात्रि पर जहां मंदिरों में कार्यक्रम होंगे, वहीं विभिन्न संस्थाओं ने भी अलग-अलग शिवरात्रि महोत्सव का आयोजन रखा है। शमशानेश्वर, डालमिया, चौमुखा, 14 महादेव, अर्दनारीश्वर, अग्रेश्वर, तिलकेश्वर, पारेश्वर आदि मंदिरों में भी चार प्रहर की पूजा होगी। महारुद्र अभिषेक एवं पार्थिव शिवलिंग निर्माण पूजन एवं रुद्राक्ष वितरण कार्यक्रम होंगे। शिव-हनुमान देवालय जिसमें कार्तिकेय की जगह विराजित है हनुमान जी की प्रतिमा। प्रमोद कल्याण | भरतपुर बिहारी जी परिक्रमा मार्ग स्थित जवाहर बुर्ज के ठीक नीचे स्थित शिवालय अनूठा है। यहां शिव परिवार की प्रतिमाओं में कार्तिकेय की जगह हनुमानजी विराजे हैं। इसलिए इसे शिव-हनुमान मंदिर कहा जाता है। यह मंंदिर करीब 261 साल पुराना है। पुजारी सुभाष व्यास बताते हैं कि सन् 1764 में महाराजा जवाहर सिंह ने अपने पिता महाराजा सूरजमल की मौत का बदला लेने के लिए दिल्ली पर नजीबउद्दौला के खिलाफ चढ़ाई की तो उससे पहले विजय की कामना के लिए भगवान शिव की विशेष आराधना की। इसके लिए जवाहर बुर्ज के ठीक नीचे सैनिक आवास परिसर में शिव परिवार की स्थापना की गई, लेकिन यहां कार्तिकेय के स्थान पर हनुमान जी को विराजमान किया गया। इतिहास की जानकार डॉ. सुधा सिंह बताती हैं कि संभवत: ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि हनुमान जी रियासत के इष्ट थे। रियासत के ध्वज पर हनुमान जी का चित्र था। भगवान शिव को रौद्र रूप यानी भयंकर योद्धा के रूप में माना जाता है वहीं हनुमान जी को सत्य के लिए युद्ध अभियान का प्रतीक माना गया है इसलिए संभवत महाराजा जवाहर सिंह ने शिव परिवार में हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित किया। शिवालय की जलहरी के पानी निकासी के लिए ककैया ईंटों की नाली बनी है, जिसका पानी सुजान गंगा नहर में गिरता है। मंदिर के बाजू में कलात्मक पत्थरों का एक बरामदा भी है, जिसमें रियासत कालीन फव्वारा भी लगा है। यद्यपि अब यह क्षतिग्रस्त है। मंदिर परिसर की छत टूट गई है। क्षेत्रीय विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने मंदिर के महत्व को देखते हुए विधायक कोटे से 5 लाख रुपए मरम्मत बाबत हाल ही में मंजूर किए हैं। देवस्थान विभाग के रिकार्ड में यह मंदिर आत्मनिर्भर श्रेणी का है और सुभाष व्यास वंशज परंपरा अनुसार पूजा-सेवा करते आ रहे हैं। यहां सावन मास के चारों सेामवार और शिव रात्रि पर चारों प्रहर की पूजा होती है।


