जमानत पेश करने के बावजूद 2 युवकों को जेल में रखने के मामले में हाईकोर्ट ने बाड़मेर के गुड़ामालानी SDM केशव कुमार मीणा को तलब किया है। हाईकोर्ट में SDM को बताना होगा कि किस कानून के तहत दोनों को 5 दिन जेल में रखा गया। जबकि दोनों सुनवाई के दिन ही जमानत बॉन्ड पेश कर चुके थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा- निवारक (प्रिवेंटिव) धाराओं का उपयोग सजा देने के लिए नहीं किया जा सकता। जमानत प्रस्तुत किए जाने के बावजूद सत्यापन के नाम पर हिरासत में रखना मनमाना प्रतीत होता है। कानून की आड़ में किसी को जेल में रखना स्वीकार्य नहीं है। 5 दिन भेजा था जेल हाईकोर्ट जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने ऊदा राम और मोती राम की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी एसडीएम केशव कुमार मीणा को तलब किया है। हाईकोर्ट ने ऊदा राम और मोती राम को 5 दिन जेल भेजने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए SDM के दोनों आरोपियों को जेल भेजने के आदेश को रद्द कर दिया। अब 25 फरवरी को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए है। शांति भंग में पकड़ा था याचिकाकर्ता उदा राम और मोती राम (निवासी बाड़मेर) को 25 नवंबर 2025 को झगड़े की सूचना के बाद पुलिस ने शांति भंग के संदेह में गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ BNSS की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। 26 नवंबर 2025 को उन्हें एसडीएम, गुड़ामालानी के समक्ष पेश किया गया। याचिकाकर्ताओं ने जमानत बॉन्ड प्रस्तुत कर दिए थे, लेकिन सत्यापन के नाम पर जमानत स्वीकार नहीं की गई और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बाद में सत्यापन रिपोर्ट आने पर 29 नवंबर 2025 को उन्हें रिहा किया गया।
आदेश रद्द, SDM को पेश होने का निर्देश हाईकोर्ट ने 26 नवंबर 2025 का एसडीएम द्वारा पारित आदेश निरस्त (quash) कर दिया। साथ ही, एसडीएम, बाड़मेर को अगली सुनवाई (25 फरवरी 2026) पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि किस कानूनी प्रावधान के तहत ऐसा आदेश पारित किया गया। ————————————————————————————————— यह खबर भी पढ़ें… हाईकोर्ट बोला- डिक्री दीवार पर टांगने वाला शोपीस नहीं है: मालिकाना हक के लिए सिर्फ कब्जा काफी नहीं, रजिस्ट्री दस्तावेज भी अहम राजस्थान हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद के मामले में अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा- समझौते के आधार पर हुई डिक्री को केवल संपत्ति पर कब्जा देकर पूरा नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिक्री का सही लाभ तभी मिलेगा जब डिक्री धारक को संपत्ति का वैध स्वामित्व रजिस्ट्री प्राप्त हो। (पूरी खबर पढ़ें)


