नागौर के खींवसर में कोर्ट के बाहर अधिवक्ता संघ से जुड़े वकीलों ने मंगलवार को धरना दिया। वकीलों का कहना है कि पांचौड़ी और भावंडा थानों के फौजदारी मामलों को नागौर के बजाय खींवसर के सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में शामिल किया जाए। वकीलों ने विधायक रेवंतराम डांगा को ज्ञापन सौंपकर विधानसभा में सरकार का ध्यान आकर्षित करने का आग्रह किया। वकीलों ने कहा- वर्तमान में पांचौड़ी और भावंडा थानों के फौजदारी मामलों पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार नागौर सिविल कोर्ट के पास है। ऐसे में इन क्षेत्रों के लोगों और वकीलों को अदालती कार्यवाही के लिए नागौर मुख्यालय जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। हमारी प्रमुख मांग यही है कि पांचौड़ी और भावंडा थानों के फौजदारी मामलों को खींवसर के सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में शामिल किया जाए। 9 महीने बाद भी कदम नहीं उठाया वकीलों ने बताया- पहले भी इस मांग को लेकर उच्च न्यायालय और जिला प्रशासन से आश्वासन ही मिले। 9 महीने बीत गए लेकिन कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। अधिवक्ता संघ ने सिविल न्यायालय के लिए पहले से चिह्नित भूमि का आवंटन जल्द पूरा करने की मांग भी की। मांगों के समर्थन में वकील 20 फरवरी से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जायज मांगें नहीं मानी तो न्यायिक कार्यों का बहिष्कार जारी रखेंगे।


